Jharkhand SNA Sparsh, रांची: झारखंड में एसएनए स्पर्श (SNA Sparsh) प्रणाली के तहत सरकारी योजनाओं के भुगतान में देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं। इस व्यवस्था को लागू करते समय केंद्र सरकार की ओर से पारदर्शिता बढ़ाने और भुगतान प्रक्रिया सरल करने की बात कही गई थी, लेकिन राज्य के कई विभागों में बिलों के भुगतान में परेशानी होने का दावा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि भुगतान लंबित रहने से विभिन्न कार्य विभागों की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। काम पूरा करने के बाद भी राशि नहीं मिलने से ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों के बीच परेशानी बढ़ रही है। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी भुगतान प्रक्रिया में खामियों की बात स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार तक राज्य की समस्याएं पहुंचाने की जानकारी दी है।
बिल पास कराने की प्रक्रिया में आ रही परेशानी
एसएनए स्पर्श प्रणाली के तहत ट्रेजरी से बिल पास कराने के लिए कई स्तरों पर आंकड़े और आवश्यक विवरण दर्ज करने पड़ते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, किसी जरूरी जानकारी के छूटने या त्रुटि होने पर बिल अटक सकता है अथवा निरस्त हो सकता है। इससे बिल तैयार करने और भुगतान की प्रक्रिया धीमी होने की शिकायतें मिल रही हैं। विभागीय स्तर पर बिल बनाने से लेकर ट्रेजरी से राशि जारी होने तक देरी की स्थिति सामने आ रही है। इसका असर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ने की बात कही जा रही है।
जल संसाधन विभाग में करोड़ों रुपये का भुगतान लंबित
रिपोर्ट के अनुसार, जल संसाधन विभाग में विभागीय स्तर पर चार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान अटका हुआ है। वहीं, बिल पास होने के बाद ट्रेजरी में 60 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबित बताई गई है। गिरिडीह जिले की योजनाओं से संबंधित भुगतान भी प्रभावित होने की बात सामने आई है। यहां लगभग 35 करोड़ रुपये के बिल तैयार किए गए, जिनमें से करीब 17 करोड़ रुपये के बिल ट्रेजरी में लंबित बताए जा रहे हैं। पलामू में भी बड़ी राशि ट्रेजरी में अटके होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, इन आंकड़ों की विभागवार आधिकारिक पुष्टि और लंबित भुगतान की अद्यतन स्थिति उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।
नगर विकास और मनरेगा योजनाओं पर भी असर
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नगर विकास विभाग में भी करोड़ों रुपये का भुगतान लंबित है। रांची, धनबाद और बोकारो में संचालित कई योजनाओं की राशि समय पर जारी नहीं होने की शिकायतें हैं। मनरेगा के भुगतान में देरी का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग दो महीने बीतने के बाद भी कुछ भुगतान नहीं हो सके थे। विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत भी भुगतान शुरू नहीं होने की बात कही गई है। इन योजनाओं में भुगतान की मौजूदा स्थिति की पुष्टि के लिए संबंधित विभागों के नवीनतम आंकड़े जरूरी हैं।
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र तक पहुंचाई बात
झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भुगतान व्यवस्था में खामियों की बात कही है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली को लेकर देश के कई राज्यों से शिकायतें केंद्र सरकार तक पहुंच रही हैं और झारखंड ने भी अपनी समस्याओं से केंद्र को अवगत कराया है। वित्त मंत्री के अनुसार, भुगतान प्रक्रिया की मौजूदा समस्याओं का समाधान जरूरी है, ताकि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए राशि समय पर जारी हो सके। फिलहाल, राज्य के विभिन्न विभागों में लंबित भुगतान की समस्या को लेकर उठाए गए सवालों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रक्रिया में आ रही तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।


















