झारखंड हाईकोर्ट ने तलाक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज नहीं होने से पत्नी की गवाही खारिज नहीं की जा सकती।
Jharkhand High Court रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद और क्रूरता के आरोपों से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ इस आधार पर पत्नी की गवाही को अविश्वसनीय नहीं माना जा सकता कि उसने पति के खिलाफ मारपीट और क्रूरता के आरोपों को लेकर प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई थी। वैवाहिक मामलों में क्रूरता के आरोपों का आकलन उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के 9 फरवरी 2026 के फैसले और 16 फरवरी 2026 की डिक्री को रद्द कर दिया। अदालत पत्नी की ओर से दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी।
Jharkhand High Court का अहम फैसला, FIR नहीं होना गवाही खारिज करने का आधार नहीं
हाईकोर्ट में पत्नी ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी तलाक याचिका खारिज कर दी गई थी। तलाक की याचिका विशेष विवाह अधिनियम, 1954 की धारा 27 (1) (बी) और (डी) के तहत दाखिल की गई थी। इसके बाद पत्नी ने फैमिली कोर्ट अधिनियम, 1984 की धारा 19 (1) के तहत हाईकोर्ट में अपील दायर की।
सुनवाई के दौरान वैवाहिक क्रूरता के आरोपों और पत्नी की गवाही के मूल्यांकन का मुद्दा सामने आया। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल प्राथमिकी दर्ज नहीं कराए जाने के आधार पर पत्नी के बयान को अविश्वसनीय नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर आरोपों की जांच जरूरी है।
Key Highlights
- झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद में अहम टिप्पणी की।
- प्राथमिकी दर्ज नहीं होने से पत्नी की गवाही अपने आप अविश्वसनीय नहीं हो जाती।
- अदालत ने फैमिली कोर्ट के 9 फरवरी 2026 के फैसले और 16 फरवरी 2026 की डिक्री को रद्द किया।
- पत्नी ने पति पर मारपीट, गाली-गलौज और भरण-पोषण की जिम्मेदारी नहीं निभाने का आरोप लगाया था।
- पत्नी ने 15 मार्च 2018 को दोनों बच्चों के साथ घर से निकाले जाने का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की थी।
Jharkhand High Court: 2010 में हुई थी शादी, दो बच्चों के साथ घर से निकालने का आरोप
मामले के अनुसार, दंपती का विवाह 20 अक्टूबर 2010 को जमशेदपुर के विवाह अधिकारी के समक्ष हुआ था। दोनों के दो बच्चे हैं। पत्नी ने आरोप लगाया कि बेटे के जन्म के बाद पति शराब पीने लगा और उसके साथ मारपीट तथा गाली-गलौज करने लगा।
पत्नी के अनुसार, वर्ष 2015 में ससुर की मृत्यु के बाद पति का व्यवहार और अधिक हिंसक हो गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि पति ने काम करना बंद कर दिया और परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी नहीं निभाई।
Jharkhand High Court: 15 मार्च 2018 को बच्चों के साथ घर से निकालने का आरोप
पत्नी ने अदालत को बताया कि 15 मार्च 2018 को उसे दोनों बच्चों के साथ वैवाहिक घर से निकाल दिया गया था। इसके बाद वह अपने माता-पिता के पास रहने लगी। परिवार का खर्च चलाने के लिए उसने निजी नौकरी की और अपने साथ बच्चों की जिम्मेदारी भी संभाली।
फैमिली कोर्ट ने पहले तलाक की याचिका खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले और डिक्री को रद्द कर दिया है। इस फैसले में अदालत ने वैवाहिक विवादों में क्रूरता के आरोपों का आकलन करते समय उपलब्ध साक्ष्यों को महत्व देने की बात कही है।


















