झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि तलाक के बाद भी पति पूर्व पत्नी को बेसहारा नहीं छोड़ सकता। लातेहार के मामले में पत्नी को 30 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया गया।
Jharkhand High Court रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने तलाक और गुजारा भत्ता से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि विवाह समाप्त होने के बाद भी पति अपनी पूर्व पत्नी को बेसहारा नहीं छोड़ सकता। अदालत ने कहा कि पत्नी के सम्मानजनक जीवन और भविष्य की सुरक्षा के लिए उसकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति के अनुरूप उचित गुजारा भत्ता देना पति की कानूनी जिम्मेदारी है।
Jharkhand High Court: पत्नी को 30 लाख रुपये देने का आदेश
हाईकोर्ट ने लातेहार के एक दंपती के वैवाहिक विवाद में फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक के फैसले को बरकरार रखते हुए पति को पूर्व पत्नी को 30 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया है। अदालत ने आदेश दिया कि यह राशि 12 महीने के भीतर चार समान किस्तों में अदा की जाए। पहली किस्त का भुगतान अगले दो महीने के भीतर करना होगा।
Key Highlights
झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व पत्नी के अधिकार पर अहम फैसला सुनाया।
पति को पत्नी को 30 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश।
12 महीने में चार समान किस्तों में राशि का भुगतान करना होगा।
कोर्ट ने कहा, भरण पोषण दया नहीं बल्कि पत्नी का कानूनी अधिकार है।
मामला लातेहार के दंपती और फैमिली कोर्ट के तलाक से जुड़ा है।
Jharkhand High Court: भरण पोषण दया नहीं, कानूनी अधिकार
अपने फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि भरण पोषण किसी प्रकार की दया या सहानुभूति नहीं है, बल्कि पत्नी का कानूनी अधिकार है। अदालत ने कहा कि गुजारा भत्ता का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तलाक के बाद भी महिला आत्मसम्मान और गरिमा के साथ अपना जीवन यापन कर सके।
Jharkhand High Court: क्या है पूरा मामला
मामला लातेहार की एक महिला और बिहार के दानापुर स्थित सशस्त्र सीमा बल की 40वीं बटालियन में तैनात एक सिपाही से जुड़ा है। दोनों का विवाह वर्ष 2017 में हुआ था। पति की याचिका पर लातेहार फैमिली कोर्ट ने वर्ष 2022 में तलाक की मंजूरी दे दी थी। इसके खिलाफ पत्नी ने झारखंड हाईकोर्ट में अपील दायर की।
अपील लंबित रहने के दौरान जनवरी 2025 में पति ने दूसरा विवाह कर लिया। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने तलाक के फैसले को बरकरार रखते हुए पत्नी के आर्थिक अधिकारों की रक्षा के लिए 30 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश पारित किया।
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