Bihar Rabi Farming Target 2026: बिहार सरकार ने वर्ष 2026 के रबी महाअभियान के तहत करीब 48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में वासंतिक यानी रबी फसलों की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले वर्ष लगभग 42 लाख हेक्टेयर में इन फसलों की खेती हुई थी। इस बार लक्ष्य बढ़ाए जाने के साथ कृषि विभाग ने किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने और योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन पर जोर दिया है। सोमवार को पटना स्थित बामेती सभागार में आयोजित वासंतिक (रबी) महाअभियान सह कार्यशाला को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्य हासिल करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि खेती के लक्ष्य को पूरा करने में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलों, प्रखंडों और पंचायतों में नियमित समीक्षा कर कमियों को दूर किया जाएगा।
गेहूं और मक्का समेत अलग-अलग फसलों का लक्ष्य तय
कृषि विभाग ने इस रबी सीजन के लिए विभिन्न फसलों की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया है।
- गेहूं: 24 लाख हेक्टेयर
- वासंतिक मक्का: 6 लाख हेक्टेयर
- दलहन: 5 लाख हेक्टेयर
- तिलहन: 4 लाख हेक्टेयर
- आलू, सब्जी, मसाला और अन्य फसलें: 9 लाख हेक्टेयर
कृषि मंत्री ने कहा कि निर्धारित लक्ष्य केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि खेतों में वास्तविक प्रगति दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं की नियमित निगरानी करने और किसानों को खेती के दौरान आने वाली समस्याओं का समाधान करने का निर्देश दिया।

गुणवत्तापूर्ण बीज नहीं मिला तो होगी जांच
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि अच्छी खेती के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज सबसे जरूरी है। किसानों को समय पर प्रमाणित और उन्नत बीज उपलब्ध कराना कृषि विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए। बीज की गुणवत्ता में कमी की शिकायत मिलने पर जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने बिहार कृषि मोबाइल ऐप और अन्य डिजिटल माध्यमों से किसानों को बीज की उपलब्धता तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी समय पर देने पर भी जोर दिया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि कृषि योजनाओं में भ्रष्टाचार के प्रति सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की है और योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचना चाहिए।

दलहन-तिलहन और प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
कृषि मंत्री ने मसूर, चना और सरसों जैसी दलहन एवं तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, इन फसलों से किसानों की आमदनी बढ़ाने और देश की कृषि संबंधी जरूरतों में आत्मनिर्भरता मजबूत करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील की। साथ ही जीरो टिलेज तकनीक, मिट्टी की जांच, संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खाद, हरी खाद, फसल चक्र और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। इन तरीकों से खेती की लागत कम करने, उत्पादन बढ़ाने और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

युवाओं, महिलाओं और डिजिटल कृषि पर जोर
कार्यशाला में कृषि मंत्री ने कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों की ओर से विकसित तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि कृषि यंत्र, बीज उत्पादन, मशरूम उत्पादन, नर्सरी, ड्रोन, प्रसंस्करण और विपणन जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं हैं। महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा एग्रीस्टैक के तहत फार्मर आईडी बनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए। कार्यशाला में महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के बाद भी बिहार के किसान मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं और कृषि विभाग उनकी समस्याओं के समाधान के लिए काम कर रहा है। इस अवसर पर कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. वीरेंद्र यादव सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक मौजूद थे।


















