Muzaffarpur SKMCH News: श्रीकृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (SKMCH) की इमरजेंसी व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। शुक्रवार रात गायघाट थाना क्षेत्र के कमरथू गांव में खेलने के दौरान कांच पर गिरने से तीन वर्षीय शिवांस की नाक कट गई। बच्चे के पिता संतोष कुमार उसे लेकर पहले गायघाट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जहां से उसे SKMCH रेफर कर दिया गया। परिजनों के अनुसार, एसकेएमसीएच पहुंचने के बाद इमरजेंसी में पर्चा कटाने के बावजूद बच्चे को ईएनटी विभाग के चिकित्सक के लिए करीब आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान बच्चा घायल अवस्था में था और उसके परिजन उपचार के लिए परेशान होते रहे।
ईएनटी विभाग के डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं मिले
मिली जानकारी के अनुसार, रात की ड्यूटी में तैनात सीनियर रेजिडेंट डॉ. अकबर जमां और जूनियर रेजिडेंट डॉ. इमाम अंसारी मौके पर उपलब्ध नहीं थे। इस वजह से बच्चे को तत्काल ईएनटी चिकित्सक की देखरेख में उपचार नहीं मिल सका।घटना ने अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था और ड्यूटी पर चिकित्सकों की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, संबंधित चिकित्सकों का पक्ष इस मामले में सामने नहीं आया है।
कंट्रोल रूम से जानकारी के बाद मिला प्राथमिक उपचार
रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल के कंट्रोल रूम मैनेजर ने शुरुआत में चिकित्सक के मौजूद होने की जानकारी दी। बाद में पूछताछ के दौरान चिकित्सक के उपलब्ध नहीं होने की बात स्वीकार की गई। इसी बीच बच्चे की हालत देखकर वहां मौजूद एक स्थानीय युवक ने मदद की। उसने बच्चे के घाव और अस्पताल के कागजात की तस्वीरें वाट्सएप के जरिए दूसरे चिकित्सक को भेजीं। वहां से मिले निर्देशों के आधार पर बच्चे को ड्रेसिंग कक्ष में प्राथमिक उपचार मिल सका।
12 अक्टूबर के निरीक्षण में भी सामने आई थी अनुपस्थिति
इससे पहले 12 अक्टूबर को एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ. महेश प्रसाद ने इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण किया था। रिपोर्ट के अनुसार, उस दौरान रोस्टर ड्यूटी के तहत ईएनटी विभाग की सीनियर रेजिडेंट डॉ. दिव्या भारती, हड्डी रोग विभाग के डॉ. निशांत कुमार और जूनियर रेजिडेंट डॉ. इमरान अंसारी व सर्जरी विभाग के डॉ. वेद भूषण ड्यूटी स्थल पर नहीं मिले थे।
वेतन कटौती के निर्देश के बाद भी व्यवस्था पर सवाल
अधीक्षक को ईएनटी और नेत्र विभाग के चिकित्सकों के इमरजेंसी ड्यूटी से अनुपस्थित रहने की शिकायतें भी मिली थीं। इसके बाद संबंधित चिकित्सकों के एक दिन के वेतन में कटौती के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद अब एक घायल बच्चे को ईएनटी चिकित्सक के इंतजार में समय बिताना पड़ा। घटना ने अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी की निगरानी और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


















