Cyber Crime in Jharkhand: साइबर ठगी के नेटवर्क में देवघर देश में तीसरे, गिरिडीह फर्जी सिम जारी करने में 10वें स्थान पर

 झारखंड में साइबर अपराध के नेटवर्क को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। देवघर साइबर अपराध में देश में तीसरे, दुमका 14वें और गिरिडीह फर्जी सिम जारी करने में 10वें स्थान पर है।


Cyber Crime in Jharkhand रांची: झारखंड में साइबर अपराध के नेटवर्क की जड़ें लगातार फैलती नजर आ रही हैं। कभी जामताड़ा साइबर ठगी के लिए देशभर में चर्चित था, लेकिन अब देवघर, धनबाद, दुमका और गिरिडीह जैसे जिले भी इस नेटवर्क को लेकर चर्चा में हैं। केंद्र सरकार की अगस्त 2026 में हुई प्रगति समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, साइबर अपराध, ठगी में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड जारी करने और ठगी की रकम निकालने जैसे अलग-अलग मानकों पर झारखंड के कई जिले देश के शीर्ष 15 जिलों में शामिल हैं।

Cyber Crime in Jharkhand: साइबर अपराध के मामलों में देवघर तीसरे और दुमका 14वें स्थान पर

केंद्र सरकार की प्रगति समीक्षा बैठक में साइबर अपराध से जुड़े विभिन्न मानकों पर देश के शीर्ष 15 जिलों की पहचान की गई। साइबर अपराध के मामलों में झारखंड का देवघर देश में तीसरे स्थान पर है, जबकि दुमका 14वें स्थान पर है।

ये आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में साइबर अपराध का नेटवर्क केवल जामताड़ा तक सीमित नहीं रह गया है। राज्य के अन्य जिलों में भी साइबर अपराध से जुड़े मामलों और उनसे संबंधित गतिविधियों पर निगरानी की जरूरत है।

साइबर अपराधी मोबाइल फोन, बैंक खातों और अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। ऐसे मामलों में अपराधियों तक पहुंचने के लिए ठगी के पूरे नेटवर्क की पहचान करना महत्वपूर्ण होता है।

Cyber Crime in Jharkhand: फर्जी सिम कार्ड जारी करने में गिरिडीह देश में 10वें स्थान पर

साइबर ठगी को अंजाम देने में मोबाइल सिम कार्ड की अहम भूमिका होती है। अपराधी कथित तौर पर फर्जी पहचान या दूसरे लोगों के दस्तावेजों के आधार पर जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे उनकी पहचान तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

केंद्र सरकार की समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड जारी करने के मामले में झारखंड का गिरिडीह देश में 10वें स्थान पर है। इस सूची में बिहार का नालंदा दूसरे और अरवल चौथे स्थान पर है।

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम जारी होने की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सिम जारी करने की प्रक्रिया में पहचान सत्यापन और संदिग्ध कनेक्शनों की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।

Cyber Crime in Jharkhand: साइबर ठगी की रकम निकालने में धनबाद देश में 13वें स्थान पर

साइबर ठगी के बाद रकम को बैंक खातों, एटीएम और अन्य माध्यमों से निकालना अपराधियों के नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी है। ठगी की रकम निकालने के मामले में झारखंड का धनबाद देश में 13वें स्थान पर है।

इस सूची में कोलकाता पहले और पटना दूसरे स्थान पर है। ठगी की रकम निकालने के लिए अपराधी अलग-अलग बैंक खातों और एटीएम का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे मामलों में रकम के लेनदेन की कड़ी का पता लगाना जांच एजेंसियों के लिए अहम होता है।

Cyber Crime in Jharkhand: चार मानकों पर तैयार की गई साइबर अपराध की सूची

अगस्त 2026 में हुई केंद्र सरकार की प्रगति समीक्षा बैठक में देश के शीर्ष 15 जिलों की पहचान चार प्रमुख मानकों के आधार पर की गई थी। इनमें साइबर अपराध के सर्वाधिक मामले, साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड जारी करना, म्यूल बैंक खाते खोलना और साइबर ठगी की रकम एटीएम तथा चेक के जरिये निकालना शामिल हैं।

इन मानकों पर तैयार सूचियों में झारखंड के देवघर, दुमका, गिरिडीह और धनबाद के नाम सामने आए हैं। वहीं, बिहार के कई जिले भी अलग-अलग श्रेणियों में शामिल हैं।


Key Highlights


Cyber Crime in Jharkhand: म्यूल बैंक खातों के मामले में भी बिहार के जिले सूची में

साइबर ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में स्थानांतरित करने के लिए म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे खाते कई बार दूसरे लोगों के नाम पर खोले जाते हैं या उनके खाताधारकों को कमीशन का लालच देकर इस्तेमाल किए जाते हैं।

म्यूल बैंक खातों से संबंधित सूची में बिहार की राजधानी पटना देश में नौवें स्थान पर है। इसके अलावा साइबर अपराध के मामलों में बिहार का नवादा दूसरे, नालंदा चौथे और पटना नौवें स्थान पर है।

अलग-अलग मानकों पर झारखंड और बिहार के जिलों की मौजूदगी से स्पष्ट होता है कि साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई में केवल ठगी करने वालों को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं है। फर्जी सिम कार्ड, बैंक खातों और ठगी की रकम निकालने वाले नेटवर्क की पहचान करना भी जरूरी है।

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