Mahabalipur Wrestling Competition, पटना: पालीगंज प्रखंड क्षेत्र के महाबलीपुर गांव में मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के अवसर पर करीब 150 वर्षों से चली आ रही पारंपरिक कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। गुरुवार को ऐतिहासिक अखाड़े में आयोजित दंगल में विभिन्न क्षेत्रों से आए पहलवानों ने अपनी कुश्ती कला, फुर्ती और दमखम का प्रदर्शन किया। दर्शकों से खचाखच भरे अखाड़े में पहलवानों के बीच कई रोमांचक मुकाबले हुए। प्रतियोगिता में महाबलीपुर के पहलवान राजू यादव को अखाड़े का सर्वश्रेष्ठ पहलवान घोषित किया गया। इस आयोजन ने गांव की पुरानी खेल परंपरा और ग्रामीण खेल संस्कृति की झलक पेश की।
सुनील यादव ने फीता काटकर किया दंगल का उद्घाटन
कुश्ती प्रतियोगिता का उद्घाटन पालीगंज विधानसभा क्षेत्र के पूर्व एनडीए प्रत्याशी और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के पिछड़ा-अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सुनील यादव ने फीता काटकर किया। उद्घाटन के बाद पहलवानों के बीच मुकाबले शुरू हुए। दंगल देखने के लिए आसपास के गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में खेलप्रेमी पहुंचे। अखाड़े में पहलवानों के दांव-पेंच और ताकत के प्रदर्शन ने दर्शकों का ध्यान खींचा।
12 जोड़ी पहलवानों ने मुकाबलों में दर्ज की जीत
प्रतियोगिता में राजू यादव को सर्वश्रेष्ठ पहलवान चुने जाने के अलावा 12 जोड़ी अन्य पहलवानों ने भी अपने मुकाबलों में जीत हासिल की। विजेता पहलवानों में विभिन्न गांवों के खिलाड़ी शामिल रहे।
विजेता पहलवानों की सूची इस प्रकार है:
- मोहम्मदपुर: दीपक चंद्रवंशी, मनोज चंद्रवंशी और रजनीश कुमार
- महाबलीपुर: सचिन यादव और सनी यादव
- अकुरी: दीपक गोस्वामी और सुभाष कुमार
- नगला: राहुल कुमार
- बैदराबाद: प्रेम कुमार
- रकसिया: गुड्डू यादव
- तेलपा: मुकेश यादव
- धोखहरा: मंटू यादव
विजेताओं को चांदी के मेडल और नकद पुरस्कार
दंगल के समापन पर सभी विजेता पहलवानों को चांदी के मेडल और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण लोजपा (रामविलास) नेता सुनील यादव, स्थानीय मुखिया निकेश कुमार, समाजसेवी शिवप्यारे सिंह और बिपिन पाठक ने किया। आयोजकों और अतिथियों ने इस परंपरा को ग्रामीण खेल संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि इस तरह के आयोजन युवाओं को पारंपरिक कुश्ती से जोड़ने और स्थानीय खेल विरासत को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।
पारंपरिक कुश्ती से जुड़ी है गांव की पहचान
महाबलीपुर में करीब डेढ़ शताब्दी से आयोजित हो रही कुश्ती प्रतियोगिता गांव की सांस्कृतिक और खेल परंपरा का हिस्सा है। मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के अवसर पर आयोजित होने वाला यह दंगल पहलवानों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच देता है। ऐसे पारंपरिक आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में खेल भावना को प्रोत्साहित करने के साथ स्थानीय परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में भी भूमिका निभाते हैं।


















