Airtel International Roaming Compensation, पटना: अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सेवा उपलब्ध नहीं कराने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना ने भारती टेलीमीडिया लिमिटेड और एयरटेल स्टोर को शिकायतकर्ताओं को कुल 1.25 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग ने दोनों पक्षों को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया है। बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से 23 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आयोग ने मुआवजे और मुकदमे के खर्च सहित यह राशि देने का आदेश दिया है।
मलेशिया में काम नहीं कर पाई अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सेवा
यह मामला परिवाद संख्या 80/2016 से संबंधित है। शिकायतकर्ता पुष्कर शर्मा और दीप्ति शर्मा ने आरोप लगाया था कि जनवरी 2016 में विदेश यात्रा के दौरान उनके मोबाइल नंबर पर अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सेवा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। शिकायत के अनुसार, मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में रहने के दौरान रोमिंग सेवा काम नहीं कर सकी। शिकायतकर्ताओं ने कई बार इस समस्या की शिकायत की, लेकिन उनके मुताबिक इसका प्रभावी समाधान नहीं किया गया।
आयोग ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों के तर्कों, दस्तावेजों, एसएमएस संवादों और शिकायतों से संबंधित साक्ष्यों पर विचार किया। आयोग ने पाया कि अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन देने के बावजूद सेवा प्रभावी रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई। इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया। शिकायतकर्ताओं ने इस वजह से हुई असुविधा, मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए मुआवजे की मांग की थी।
1 लाख रुपये मुआवजा, 25 हजार रुपये मुकदमे का खर्च
आयोग ने अपने आदेश में शिकायतकर्ताओं को कुल 1,25,000 रुपये देने का निर्देश दिया है। इसमें राशि का विवरण इस प्रकार है:
- 1,00,000 रुपये: असुविधा, उत्पीड़न और मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा।
- 25,000 रुपये: मुकदमे के खर्च के रूप में।
इस प्रकार दोनों विपक्षी पक्षों को संयुक्त रूप से कुल 1.25 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।
60 दिनों में भुगतान नहीं तो 12% वार्षिक ब्याज
आयोग के आदेश के अनुसार, निर्धारित राशि का भुगतान आदेश की प्रति प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर करना होगा। तय अवधि में भुगतान नहीं किए जाने पर बकाया राशि पर भुगतान होने तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र और सदस्य रजनीश कुमार ने पारित किया। यह मामला उपभोक्ता सेवाओं में कमी होने पर शिकायत और मुआवजे की मांग के महत्व को भी रेखांकित करता है।


















