रंग लाया तीस वर्षो का संघर्ष, नेटरहाट फायरिंग रेंज को अब नहीं किया जाएगा अधिसूचित

Ranchi– नेटरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के विरोध में आदिवासी समुदाय का तीस वर्षों का आन्दोलन आखिरकार रंग लाया,

इन सैंकड़ों गांवों के हजारों आदिवासियों ने तीस वर्षों तक लम्बा संघर्ष किया, सरकार बदलती रही,

लेकिन आदिवासी समुदाय अपनी मांगों पर अडिग रहा और आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा.  

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस फायरिंग रेंज को अब पुन: अधिसूचित नहीं करने का निर्णय लिया है.  

पांचवी अनुसूची के अन्दर आता है लातेहार और गुमला जिला

1964 में शुरू हुए नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज का तत्कालीन बिहार सरकार द्वारा 1999 में अवधि विस्तार किया गया था.

लेकिन इस बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को पुनः अधिसूचित नहीं करने के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान कर दी.

यहां बता दें कि नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के विरोध में लातेहार जिला के करीब 39 राजस्व ग्रामों के द्वारा आम सभा के माध्यम से राज्यपाल और

झारखण्ड सरकार को भी ज्ञापन सौंपा गया था.

जिसमें नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज से प्रभावित ग्रामीणों के द्वारा जनता द्वारा लगाया गया था.

इनका कहना था कि लातेहार और गुमला जिला पांचवी अनुसूची के अन्तर्गत आता है.

यहां पेसा एक्ट 1996 लागू है, जिसके तहत् ग्राम सभा को संवैधानिक अधिकार प्राप्त है.

नेटरहाट फील्ड फायरिंग रेंज से आदिवासी बहुल गांवों के सामने मंडरा रहा था संकट

इसी अधिकार का प्रयोग कर नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के प्रभावित इलाके के ग्राम प्रधानों ने ग्राम सभा का आयोजन कर

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के लिए गांव की सीमा के अन्दर की जमीन को फायरिंग रेंज के लिए नहीं दिये जाने का निर्णय लिया था. 

साथ ही नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की अधिसूचना को आगे और विस्तार न कर

विधिवत् अधिसूचना प्रकाशित कर परियोजना को रद्द करने का अनुरोध किया था.

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज से प्रभावित जनता द्वारा पिछले लगभग 30 वर्षो से लगातार

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की अधिसूचना को रद्द करने हेतु विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था.

वर्तमान में भी प्रत्येक वर्ष की भांति नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के विरोध में 22-23 मार्च को विरोध प्रदर्शन जाता था.

रिपोर्ट- मदन

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