सरकार सतर्क नहीं हुई तो आदिवासियों को म्यूजियम में रखना पड़ेगा- Shilpi Neha Tirkey

रांची : सरकार सतर्क नहीं- मांडर से कांग्रेस विधायक शिल्पी नेहा तिर्की ने कई मुद्दों पर अपने ही सरकार को घेरा. दरअसल 23 दिसंबर को झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र का अंतिम दिन था. सत्र के दौरान उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला. जिसके बाद मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस विधायक शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि सत्र के अंतिम दिन भूमि और राजस्व के मुद्दे आना था, क्योंकि ये दोनों ही मुद्दा झारखंड के लिए महत्वपूर्ण है. एक आम आदमी अपने जेब से पैसा निकालने से पहले सोचता है, लेकिन भूमाफिया जमीन लूटने से पहले नहीं सोचता है. क्योंकि ये सब भ्रष्ट अधिकारियों के कारण होता है.

सरकार सतर्क नहीं: मौका मिलता तो खुल जाता भ्रष्ट अधिकारियों के पोल

शिल्पी नेहा तिर्की ने अपने ही सरकार को कटघरे में करती हुईं बोली कि सत्र के दौरान मेरे दो मुद्दे थे, जिसके बारे में मुझे जानकारी देनी थी. भूमि सूधार को लेकर अगर मुझे बोलने का मौका मिलता तो आज कई भ्रष्ट अधिकारियों का पोल खुल जाता. उन्होंने कहा कि मैं तो इसे साजिश और एजेंडा ही कहूंगी. क्योंकि अल्पसूचित और ध्यानाकर्षण में ही विपक्ष ने इतना बवाल किया कि हमें सदन में अपनी बातों का रखने का मौका ही नहीं मिला.

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मुझसे संपर्क करने की कोशिश की गई- शिल्पी नेहा तिर्की

कांग्रेस विधायक ने भ्रष्ट अधिकारी पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब उन्हें मालूम हुआ कि मेरा नाम इस मामले में सामने आने वाला है तो मुझसे उन्होंने संपर्क करने का प्रयास किया. ताकि मैं इस मामले को सदन से बाइकॉट करा दूं.

बरही में 8 एकड़ वन भूमि को किया गया म्यूटेशन

उन्होंने कहा कि ये सारा मामला हजारीबाग के बरही प्रखंड का मामला है, जहां 8 एकड़ वन भूमि को म्यूटेशन कर दिया गया है. किसी मनोज यादव के नाम पर म्यूटेशन कर दिया गया है. शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि हमने इसकी जानकारी आरटीआई के माध्यम से ली. वन अधिकारी ने भी बताया है कि ये जमीन वन भूमि ही है. इस मामले में सभी अधिकारी मिले हुए हैं. जबकि इसकी जानकारी पत्र के माध्यम से उपायुक्त को भी दी गई है, लेकिन आज तक उनलोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. विधायक ने कहा कि जब हम इस मामले को सदन में उठाने वाले थे तब उपायुक्त को एक पत्र जारी किया गया.

सरकार सतर्क नहीं: ..शब्दों में सीमित हो जायेगी जल, जंगल और जमीन

कांग्रेस विधायक ने कहा कि इन सभी मामलों को लेकर अगर झारखंड सरकार सतर्क नहीं होती है तो आने वाले दिनों में जल, जंगल और जमीन केवल शब्दों में ही सीमित हो जायेगी. और जो आदिवासी है उन्हें म्यूजियम में रखना पड़ जायेगा. क्योंकि अगर जमीन और जंगल नहीं रहेगा तो आने वाले दिनों में आदिवासी विलुप्त हो जायेंगे.

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