ABVP : दिवगंत सुशील मोदी को यूपी विद्यार्थी परिषद ने किया याद

वाराणसी : ABVPदिवंगत बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी को यूपी के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने याद करते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी है। दिवंगत पूर्व डिप्टी सीएम के यूपी और वाराणसी से रहे जुड़ाव को याद करते हुए ABVP के संगठन के विस्तार और मजबूती में रहे स्व. मोदी के अवदानों को शिद्दत से याद किया। एक बयान में ABVP ने कहा कि सुशील मोदी के निधन से देश की राजनीति और राष्ट्रवादी विचारधारा को अपूरणीय क्षति हुई है। साथ ही उन्हें कुशल संगठक बताते हुए ABVP के वाराणसी समेत पूरे उत्तर प्रदेश में विस्ता में रहे योगदान को याद किया।

ABVP ने कहा कि सुशील मोदी के निधन से देश की राजनीति और राष्ट्रवादी विचारधारा को अपूरणीय क्षति हुई है। साथ ही उन्हें कुशल संगठक बताते हुए ABVP के वाराणसी समेत पूरे उत्तर प्रदेश में विस्ता में रहे योगदान को याद किया।
फाइल फोटो

ABVP संगठन से सुशील मोदी ने शुरू किया था सियासी सफर

इस मौके पर ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे डॉ. दीनानाथ सिंह ने कहा कि दिवंगत सुशील मोदी के साथ बैठकर लम्बे समय ABVP के उत्तर प्रदेश में काम करने के पलों को भुलाया नहीं जा सकता। आज सुशील जी हमारे बीच नही हैं लेकिन उनका स्मृति चित्र है। स्व. सुशील मोदी को याद करते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. दीनानाथ सिंह ने कहा कि कई घटनाएं ऐसी हैं जो उनके स्मृति पटल पर तैर रही हैं। सुशील मोदी इतने विनम्र थे कि बराबर ‘सर’ कहकर टेलीफोन उठाते थे और सदैव आत्मीय लगाव रखते थे।

 

दिवंगत सुशील मोदी के साथ बैठकर लम्बे समय ABVP के उत्तर प्रदेश में काम करने के पलों को भुलाया नहीं जा सकता।
फाइल फोटो

बिहार के डिप्टी सीएम बनने पर भी संगठन के साथियों के नहीं भूले थे सुशील मोदी

इसी क्रम में ABVP के पूर्व अध्यक्ष डॉ. दीनानाथ सिंह ने एक घटना का उल्लेख किया। बताया कि जब सुशील मोदी बिहार के उपमुख्यमंत्री बन चुके थे। एक चुनावी कार्यक्रम में भाजपा के प्रत्याशी के के पक्ष में बिहार के कैमूर जिले के चैनपुर विधानसभा के हाटा बाजार में कार्यक्रम तय था। डॉ. दीनानाथ भभुआ जा रहे थे। चैनपुर से हाटा के डिवाइडर मार्ग पर पुलिस ने यूपी ABVP के पूर्व अध्यक्ष के गाड़ी को उप मुख्यमंत्री को राह देने के लिए रोक दिया गया तो डॉ. दीनानाथ एक वृक्ष के नीचे खड़ा होकर गुजरते काफिले को निहारने लगे। तभी वीआईपी फ्लैग लगा वाहन वहां आकर रुका और सुशील मोदी उतरे एवं स्नेह से नमस्कार करते हुए डॉ. दीनानाथ से पूछा कि सर कहा जा रहे हैं। जवाब मिला भभुआ तो सुशील मोदी उन्हें अपने साथ हाटा लेकर चल दिए। सभा मंच पर प्रशासनिक अधिकारियों से खोजवाकर मंच पर भी बैठा लिया। उन्होंने मंच पर कहा कि डॉक्टर साहब संगठन में मेरे अध्यक्ष रहे और आग्रह है कि वे दो शब्द आशीर्वचन करें।

दिवंगत सुशील मोदी के सांगठनिक जीवन का आरम्भिक स्थान काशी था। घर और कार्यस्थल पर नित्य प्रति भेंट होती थी। साइकिल पर बैठकर संगठन की यात्रा होती थी। तब वाराणसी में गोविन्दाचार्य, रामदुलार राय, अशोक राय, पद्मश्री अशोक भगत आदि साथ-साथ रहकर ABVP  के लिए काम करते थे।
फाइल फोटो

ABVP में गोविंदाचार्य के साथ काशी में संगठन में किया था काम  

उस घटना को याद करते हुए डॉ. दीनानाथ सिंह ने कहा कि यह घटना सुशील मोदी के अंदर के बड़प्पन को दर्शाने के लिए काफी है। उसे भूल नहीं सकता। डॉ. सिंह ने बताया कि दिवंगत सुशील मोदी के सांगठनिक जीवन का आरम्भिक स्थान काशी था। घर और कार्यस्थल पर नित्य प्रति भेंट होती थी। साइकिल पर बैठकर संगठन की यात्रा होती थी। तब वाराणसी में गोविन्दाचार्य, रामदुलार राय, अशोक राय, पद्मश्री अशोक भगत आदि साथ-साथ रहकर ABVP  के लिए काम करते थे। उस समय के सभी साथियों ने देश में एक राजनीतिक ऊँचाई प्राप्त की किंतु वे किसी को भूले नहीं। डॉ. दीनानाथ सिंह ने आखिर में कहा कि ऐसे महान पथ प्रदर्शक का साथ छोड़कर चले जाना दुःखद है। बाबा श्री काशी विश्वनाथ उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा दुःखद परिवार एवं सहृदजनों को कष्ट सहने की क्षमता प्रदान करें।

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