बिजली-पर्यटन घोटाला: CID के बाद ED ने कसा शिकंजा, मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू

Ranchi: झारखंड में बिजली-पर्यटन विभाग से जुड़े लगभग 116 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। ईडी ने सरकारी धन की कथित लूट और हेराफेरी के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर लिया है, जिससे घोटाले में शामिल आरोपियों की मुश्किलें और गहराती नजर आ रही हैं।

ईडी ने इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत ईसीआईआर संख्या 1/2026 दर्ज की है। यह वर्ष 2026 में झारखंड से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग का पहला मामला है। एजेंसी अब यह जांच करेगी कि घोटाले की रकम कहां से आई, किन-किन खातों के माध्यम से ट्रांजैक्शन हुआ और आखिरकार पैसा किन लोगों तक पहुंचा।

CID की जांच में पहले ही सामने आ चुका है बड़ा खेल:

इससे पहले CID ने इस घोटाले में अब तक पांच चार्जशीट दाखिल की है। जांच में यह बात सामने आई है कि बिजली और पर्यटन विभाग की विभिन्न योजनाओं में सरकारी राशि की बड़े पैमाने पर हेराफेरी और गबन किया गया। योजनाओं के नाम पर फर्जी भुगतान, बिचौलियों की भूमिका और बैंकिंग सिस्टम के दुरुपयोग के सबूत भी CID की जांच में मिले हैं।

2024 में दर्ज की गई प्राथमिकी से जुड़ी हैं घोटाले की जड़ें:

इस बहुचर्चित घोटाले की जड़ें वर्ष 2024 में दर्ज की गई प्राथमिकी से जुड़ी हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत झारखंड की कई प्रमुख सरकारी संस्थाओं को निशाना बनाया। इनमें झारखंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (JTDC), झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड (JUVNL) और झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज मास्टर ट्रस्ट (JSEEMT) शामिल हैं।

जांच में सामने आया है कि पर्यटन विभाग से 10.40 करोड़ रुपये, जबकि बिजली विभाग और मास्टर ट्रस्ट से करीब 106 करोड़ रुपये की राशि की हेराफेरी की गई। फर्जी दस्तावेजों, बैंकिंग सिस्टम के दुरुपयोग और बिचौलियों की मदद से सरकारी धन को अवैध रूप से निकाला गया और अलग-अलग खातों के जरिए इधर-उधर किया गया। इस पूरे मामले को लेकर धुर्वा थाना में वर्ष 2024 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद CID ने जांच शुरू की। CID की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए और अब तक पांच चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं।

जेल में बंद हैं मुख्य आरोपी:

मामले में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बिरसा चौक शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक लोलस लकड़ा, बिचौलिया रोशन कुमार चतुर्वेदी, कुशल बनर्जी उर्फ अमित बनर्जी उर्फ अमित मुखर्जी और आरोन कुमार पांडे फिलहाल बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार में बंद हैं। इन सभी पर सरकारी धन की हेराफेरी और अवैध लेन-देन में अहम भूमिका निभाने का आरोप है।

ईडी को पूछताछ की मिली अनुमति:

ईडी को पीएमएलए कोर्ट से अनुमति मिल चुकी है, जिसके बाद एजेंसी जेल में बंद आरोपियों से पूछताछ करेगी। ईडी की पूछताछ में खास तौर पर इस बात पर ध्यान दिया जाएगा कि घोटाले की रकम को कैसे और किन माध्यमों से इधर-उधर किया गया, किसने इसका लाभ उठाया और क्या इस पैसे का इस्तेमाल किसी संपत्ति की खरीद या निवेश में किया गया।

कई और नाम हो सकते हैं उजागर:

जानकारी के अनुसार मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच आगे बढ़ने पर कई और लोगों के नाम सामने आने की संभावना है। ईडी यह भी पता लगाएगी कि क्या इस घोटाले की रकम को सफेद करने के लिए शेल कंपनियों, फर्जी खातों या रिश्तेदारों के नाम पर निवेश किया गया।

जांच से बढ़ी सियासी और प्रशासनिक हलचल:

ईडी की एंट्री के बाद इस मामले को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल ईडी और CID दोनों एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर जांच को आगे बढ़ा रही हैं और मामले पर राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं।

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