20 साल पुराने दवा घोटाला केस में सभी सात आरोपी बरी

रांची: 20 साल पुराने एक करोड़ से अधिक के दवा घोटाला मामले में एसीबी के विशेष न्यायाधीश प्रकाश झा की अदालत में सुनवाई हुई. मामला 2003 का है.

मामले में पूर्व सिविल सर्जन डॉ योगेंद्र कुमार सिन्हा, सदर अस्पताल के बड़ा बाबू उमेश कुमार तिवारी, लिपिक विष्णुदेव प्रसाद, बेलारमीन तिग्गा, सप्लायर विनोद शर्मा, रामवृत सिंह व रामवृंद सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया, इस मामले में नौ आरोपी ट्रायल फेस कर रहे थे, लेकिन सुनवाई के दौरान ही नरेश कुमार रस्तोगी तथा सारा बाला हेम्ब्रम का देहांत हो गया था.

आरोपियों की ओर से अधिवक्ता अनिल सिंह महाराणा ने पैरवी की. अभियोजन की ओर से इस मामले में 14 गवाही पेश की गयी.

अनिल सिंह महाराणा ने बताया कि अभियोजन की 14 गवाहों की गवाही घोटाले को साबित नहीं कर सकी. इस संबंध में वर्ष 2003 में एंटी करप्शन ब्यूरो के तत्कालीन डीएसपी रविकांत धान (डीआइजी के पद से सेवानिवृत) के बयान पर केस दर्ज हुआ था.

वर्ष 2017 में मामले में आरोप गठन किया गया था. मामला बाजार मूल्य से अधिक रेट पर दवा की खरीद का था. मामले में सप्लायरों को सीधे दवा सप्लाई करने का आदेश दिया गया था. मामले की जांच डीएसपी आरके धान ने की थी.

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