रांची: झारखंड में सक्रिय कुख्यात अमन साहू गिरोह के एक प्रमुख सदस्य चंदन साव को डिफॉल्ट जमानत मिल गई है। एटीएस (एंटी टेररिज्म स्क्वाड) द्वारा समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने का लाभ उसे मिला है। अदालत ने सीआरपीसी की धारा 167(2) के आधार पर उसकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है।
विशेष न्यायाधीश एस.एन. तिवारी की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। चंदन साव की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र कुमार ने दलील दी कि एटीएस ने गिरफ्तारी के 180 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की, जो कानून का उल्लंघन है। अदालत ने यह तर्क स्वीकार करते हुए डिफॉल्ट जमानत प्रदान कर दी।
29 अप्रैल को दर्ज हुआ था मामला
यह मामला एटीएस कांड संख्या 1/2024 के तहत 29 अप्रैल 2024 को दर्ज किया गया था। इस मामले में एसआई संजय दास ने गुप्त सूचना के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की थी। चंदन साव पर आरोप है कि वह होटवार जेल में बंद रहने के बावजूद टेलीफोन और जंगी ऐप के माध्यम से गिरोह के लिए आपराधिक गतिविधियों में हथियारों की आपूर्ति कर रहा था।
एक दर्जन से अधिक मामले पहले से दर्ज
हालांकि डिफॉल्ट जमानत मिलने के बावजूद चंदन साव जेल से बाहर नहीं आ पाएगा, क्योंकि उसके खिलाफ पहले से एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। वहीं, इसी कांड में नामजद एक अन्य आरोपी मनिंद्र कुमार उर्फ मिलावट के खिलाफ चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है।
जांच में देरी पर उठे सवाल
एटीएस द्वारा 180 दिनों में जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने से जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे कुख्यात अपराधियों को कानूनी छूट मिलने की संभावना बढ़ जाती है।


















