झारखंड में आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों को क्लेम भुगतान में देरी, 30 करोड़ तक बकाया, मरीजों की भर्ती प्रभावित।
Ayushman Payment Crisis Jharkhand रांची: झारखंड में आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अस्पतालों को क्लेम भुगतान में देरी से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं। पिछले एक महीने से अधिक समय से न तो निजी अस्पतालों को भुगतान मिला है और न ही सरकारी संस्थानों को राशि जारी की गई है। इस स्थिति ने मरीजों के इलाज पर भी असर डालना शुरू कर दिया है।
Ayushman Payment Crisis Jharkhand: प्रीमियम भुगतान नहीं होने से रुका क्लेम
सूत्रों के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष का प्रीमियम अब तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा बीमा कंपनी को नहीं दिया गया है। इसके कारण बीमा कंपनी ने अस्पतालों के क्लेम का भुगतान रोक दिया है। स्वास्थ्य योजनाओं के संचालन के लिए यह भुगतान अनिवार्य होता है, लेकिन देरी के कारण पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
Ayushman Payment Crisis Jharkhand: 30 करोड़ तक पहुंचा बकाया, अस्पतालों पर दबाव
राज्यभर के अस्पतालों का करीब 25 से 30 करोड़ रुपये का क्लेम बकाया बताया जा रहा है। सिर्फ रांची जिले में ही पिछले एक महीने में 5 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लंबित है। इससे अस्पतालों की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ गया है और कई संस्थानों को अपने संचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
Key Highlights
आयुष्मान योजना में क्लेम भुगतान एक महीने से लंबित
राज्यभर में 25-30 करोड़ रुपये का बकाया
प्रीमियम भुगतान नहीं होने से बीमा कंपनी ने रोका क्लेम
निजी अस्पतालों ने मरीज भर्ती में दिखाई हिचकिचाहट
तकनीकी माइग्रेशन के कारण भी फंसे कई क्लेम
Ayushman Payment Crisis Jharkhand:मरीजों की भर्ती में आनाकानी शुरू
भुगतान लंबित रहने के कारण कई निजी अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को भर्ती करने में हिचकिचाहट शुरू कर दी है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि विभागीय देरी का आर्थिक बोझ उन्हें उठाना पड़ता है, जिससे सेवाएं प्रभावित होती हैं और मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
Ayushman Payment Crisis Jharkhand:तकनीकी कारणों से भी अटके क्लेम
इस बीच निजी अस्पतालों का HEM 2.0 पोर्टल पर माइग्रेशन भी जारी है। तकनीकी प्रक्रिया के कारण कई अस्पतालों के क्लेम फंसे हुए हैं, जिससे समस्या और जटिल हो गई है। मामले में स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्टेट आरोग्य सोसायटी के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
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