बरहेट सीट: भाजपा का ‘उम्मीदवार खोजो’ अभियान, लेकिन हेमंत के सामने ‘मजबूत खिलाड़ी’ नहीं मिल रहा!

रांची: बरहेट सीट, झारखंड की राजनीति का वह मंच बन गया है जहां भाजपा का ‘उम्मीदवार खोजो’ अभियान लगातार जारी है। एसटी के लिए आरक्षित इस सीट पर झामुमो (जेएमएम) के हेमंत सोरेन लंबे समय से विजयी होते आ रहे हैं, और भाजपा के लिए यह एक ऐसा पेचीदा खेल बन गया है, जहां उनका विकेट गिरने का डर हर बार बढ़ता जा रहा है।

भाजपा का हाल ऐसा हो गया है, जैसे किसी शतरंज की बाजी में राजा तो है, पर प्यादे ही मैदान छोड़कर भाग रहे हों। पार्टी के पास कोई ऐसा दिग्गज नहीं दिख रहा जो हेमंत सोरेन को चुनौती दे सके। इस परिप्रेक्ष्य में, लुईस मरांडी को मैदान में उतारने का प्रस्ताव भी दिया गया, परंतु उन्होंने शतरंज की चाल समझते हुए “नमो नमः” करते हुए झामुमो का दामन थाम लिया। बाबूलाल मरांडी और लोबिन भी हेमंत के खिलाफ चुनाव लड़ने से परहेज करते हुए अपनी पुरानी सीटों पर ही दांव लगाने में जुट गए।

इधर, जेएमएम ने भी भाजपा की इस कठिनाई पर तंज कसते हुए कहा है कि हेमंत सोरेन के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए किसी को “कलेजा” चाहिए। और जो भी भाजपा से यह जोखिम उठाएगा, उसे ‘राजनीतिक शहादत’ के लिए तैयार होना पड़ेगा। झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे के अनुसार, हेमंत सोरेन की लोकप्रियता इस कदर बढ़ चुकी है कि उनके खिलाफ लड़ने वाले नेता का राजनीतिक करियर खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगा।

भाजपा की रणनीति का हाल ऐसा हो गया है, जैसे “बिना प्लेयर वाली टीम” क्रिकेट खेलने उतरी हो। पहले तो ‘उम्मीदवार खोजो’ अभियान चला, लेकिन मैदान में उतरने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई। यह कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा के नेता, जो हेमंत के खिलाफ पहले बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे, अब बगले झांकते नजर आ रहे हैं। जैसे मैदान में खड़े हो लेकिन बैट पकड़ने का साहस ही न हो।

साल 2014 और 2019 के चुनावों में झामुमो की जीत का अंतर भी लगातार बढ़ता रहा है। हेमंत सोरेन की पकड़ इतनी मजबूत हो गई है कि भाजपा के लिए यहां से जीतने का मतलब है ‘सपनों की दुनिया’। हर चुनाव में भाजपा का ‘स्कोर’ कम होता जा रहा है और हेमंत की ‘रनों की बारिश’ जारी है। ऐसा लगता है कि भाजपा को यहां एक सही ‘बैट्समैन’ नहीं, बल्कि कोई सुपरहीरो चाहिए जो इस बॉलिंग के खिलाफ टिक सके।

अब जब हेमंत सोरेन ने 24 अक्टूबर को बरहेट से नामांकन दाखिल करने का ऐलान कर दिया है, भाजपा के लिए स्थिति और भी ‘विलक्षण’ हो गई है। बाबूलाल मरांडी ने इस देरी पर एक फिल्मी डायलॉग मारते हुए कहा, “दिल थाम के रहिए, वक्त आने पर सब पता चल जाएगा।” लेकिन ऐसा लगता है कि वक्त आने तक भाजपा के पास कोई “हीरो” मैदान में उतारने को बचेगा ही नहीं।

झारखंड के इस चुनावी ड्रामे का असली सीन 23 नवंबर को खुलेगा, जब बरहेट की जनता अपना फैसला सुनाएगी। कौन जानता है, शायद भाजपा को इस बार भी “नो बॉल” का सामना करना पड़े और हेमंत सोरेन एक और “फ्री हिट” का फायदा उठा लें!

 

 

Dalma Naxalite campaign: दलमा में नक्सलियों पर पुलिस का शिकंजा, 1...

Dalma Naxalite campaign: दलमा और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है।...

UP Election 2027: क्या यूपी में उम्मीदवार उतारेगी JDU? मंत्री श्रवण...

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने संगठनात्मक तैयारियां तेज करने की शुरुआत कर दी है।...

Bihar Fertilizer Sale: 1 सितंबर से 19 जिलों में बदलेगी खाद...

Bihar Fertilizer Sale, पटना: बिहार में किसानों को उर्वरक की उपलब्धता और बिक्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू की...