Bharat Tiwari Encounter: एक वीडियो, जनता का गुस्सा और सरकार का फैसला… भरत तिवारी केस में नया मोड़

Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर ज़िले में भरत तिवारी के साथ हुए एनकाउंटर का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक, दोनों स्तरों पर एक बड़ा मुद्दा बन गया है। बढ़ते विवाद और उठते सवालों के बीच, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले की न्यायिक जांच की घोषणा की है। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘X’ पर जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि शाहपुर पुलिस स्टेशन इलाके के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए पुलिस एनकाउंटर की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज की देखरेख में की जाएगी।

वीडियो वायरल होने के बाद विवाद

पुलिस और भरत तिवारी के बीच एनकाउंटर 17 जून को बिलौटी गांव में हुआ था। पुलिस के अनुसार, युवक के पास हथियार था और ऑपरेशन के दौरान उसे गोली लगी थी; बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद, घटना का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे। स्थानीय लोगों ने इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और लगभग छह घंटे तक पटना-बक्सर नेशनल हाईवे को जाम रखा। जैसे-जैसे विवाद बढ़ा, शाहपुर स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) राजेश कुमार मलाकार समेत चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट की एनकाउंटर गाइडलाइंस पर ध्यान

इस घटना ने पुलिस एनकाउंटर के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की 2014 की गाइडलाइंस को भी फिर से चर्चा में ला दिया है। इन गाइडलाइंस के अनुसार, एनकाउंटर से पहले मिली किसी भी जानकारी को रिकॉर्ड करना पुलिस के लिए ज़रूरी है। अगर पुलिस कार्रवाई के दौरान किसी व्यक्ति की मौत होती है, तो FIR दर्ज की जानी चाहिए और जांच प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या दूसरे स्टेशन की पुलिस द्वारा की जा सकती है, और कुछ खास प्रोटोकॉल—जैसे पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग—का पालन किया जाना चाहिए।

देश में पहले हुए विवादित एनकाउंटर

देश भर में पुलिस एनकाउंटर के कई मामलों की जांच हुई है। कुछ मामलों में पुलिस को क्लीन चिट मिली, जबकि अन्य मामलों में उनकी कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। हैदराबाद एनकाउंटर, विकास दुबे घटना और बाटला हाउस एनकाउंटर जैसे मामलों में अलग-अलग जांच के बाद अलग-अलग नतीजे सामने आए। सहयोगी पार्टियों के नेताओं ने भी जांच की मांग की है। भरत तिवारी मामले को लेकर सरकार को सहयोगी पार्टियों के नेताओं के सवालों का सामना करना पड़ा। LJP (R) के अध्यक्ष चिराग पासवान, JD(U) नेता संजय झा, BJP नेता विजय सिन्हा, अश्विनी चौबे और ऋतुराज सिन्हा के साथ-साथ शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी समेत कई नेताओं ने इस मामले की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की थी। इस बीच, पुलिस ने इस मामले में अब तक तीन FIR दर्ज की हैं। पुलिस का आरोप है कि भरत तिवारी और उनके परिवार के कुछ सदस्यों ने अवैध हथियार छिपाने और पनाह देने में भूमिका निभाई थी। दूसरी ओर, परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि भरत तिवारी समाज सेवा के कामों में शामिल थे। अब उम्मीद है कि न्यायिक जांच के ज़रिए पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।

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