Bihar Cooperative Policy 2026: बिहार सहकारिता नीति 2026 के क्रियान्वयन में तेजी लाने का निर्देश, हर जिले में बनेगा मॉडल सहकार ग्राम

Bihar Cooperative Policy 2026, पटना: बिहार में सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक, मजबूत और व्यवसायोन्मुख बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। सहकारिता विभाग के मंत्री राम कृपाल यादव ने बिहार राज्य सहकारिता नीति, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान नीति के तहत गठित कार्य समूहों, तत्काल किए जाने वाले कार्यों और सहकारिता क्षेत्र के विस्तार से जुड़ी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सहकारिता नीति से संबंधित सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं। साथ ही, योजनाओं की नियमित समीक्षा और लगातार अनुश्रवण सुनिश्चित करने को कहा गया।

सहकारिता नीति के कार्यों को समय-सीमा में पूरा करने का निर्देश

बैठक में मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि बिहार सहकारिता नीति लागू करने वाले राज्यों में अग्रणी है। ऐसे में नीति के प्रावधानों को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें निर्धारित समय-सीमा में धरातल पर उतारना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को सहकारिता क्षेत्र को अधिक प्रभावी, आधुनिक और रोजगारपरक बनाने की दिशा में काम करने को कहा। मंत्री ने विशेष रूप से युवाओं को सहकारी समितियों और सहकारिता गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को आवश्यक कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि सहकारिता क्षेत्र में उनके लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर विकसित हो सकें।

8 कार्य समूहों को सौंपी गई अलग-अलग जिम्मेदारियां

बिहार राज्य सहकारिता नीति, 2026 के क्रियान्वयन के लिए विभागीय स्तर पर आठ कार्य समूहों का गठन किया गया है। इन समूहों को नीति के विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों के अनुरूप जिम्मेदारियां दी गई हैं। सशक्तीकरण से जुड़े कार्य समूहों में विधिक सुधार, डिजिटल सुधार और बीमा सुधार को शामिल किया गया है। वहीं, विस्तार और आय वृद्धि के अंतर्गत आदर्श सहकार ग्राम, उत्पाद ब्रांडिंग, विपणन और हरित विकास परियोजनाओं पर काम किया जाना है। भविष्य की तैयारी के तहत शिक्षा एवं प्रशिक्षण नेटवर्क, अनुसंधान, इन्क्यूबेशन और KPI आधारित सुशासन जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा महिला एवं युवा नेतृत्व, कमजोर वर्गों का सशक्तीकरण और सहकारी सूचना केंद्र के माध्यम से समावेशिता बढ़ाने की योजना है। नवीन क्षेत्रों में बहुउद्देशीय समितियों, नए सेवा क्षेत्रों और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से नई समितियों के गठन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

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हर जिले में विकसित होगा मॉडल सहकार ग्राम

समीक्षा बैठक में मंत्री ने राज्य के प्रत्येक जिले में एक मॉडल सहकार ग्राम विकसित करने का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य सहकारिता के सफल प्रयोगों को एकीकृत रूप से प्रदर्शित करना और ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं की भूमिका को मजबूत बनाना है। मंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर काम करने वाली सहकारी समितियों की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित करने को भी कहा। ऐसी समितियों की सफल कार्यप्रणाली को अन्य सहकारी संस्थाओं में लागू करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। मॉडल सहकार ग्राम के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्थानीय उत्पादन, सहकारी व्यवसाय और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने की योजना पर काम किया जा रहा है।

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PACS में Model Byelaws और निगरानी व्यवस्था पर जोर

बैठक में सहकारी समितियों में Model Byelaws अपनाने की स्थिति की भी समीक्षा की गई। विभागीय जानकारी के अनुसार, 13 जिलों में सभी पैक्स द्वारा Model Byelaws अंगीकृत किए जा चुके हैं। अन्य जिलों में भी इसे लागू करने की प्रक्रिया जारी है। भारत सरकार से प्राप्त PACS HR Policy को लागू करने के लिए आवश्यक आदेश जारी करने की कार्रवाई की जा रही है। मंत्री ने इस कार्य को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया। पैक्सों में Regulatory Compliance और व्यवसाय की निगरानी के लिए त्रिस्तरीय अनुश्रवण व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसके तहत प्रखंड, जिला और प्रमंडल स्तर पर निगरानी की व्यवस्था होगी। मुख्यालय स्तर पर भी अनुश्रवण कोषांग गठित करने की प्रक्रिया चल रही है।

मखाना, शहद और सहकारी उत्पादों के कारोबार पर फोकस

सहकारिता नीति के अनुरूप नए क्षेत्रों में व्यवसाय विकास को भी प्राथमिकता दी जा रही है। मखाना उत्पादक किसानों को संगठित रूप से कारोबार से जोड़ने के लिए 60 मखाना उत्पादक सहयोग समितियों का गठन किया गया है। इसी तरह, शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 144 प्रखंडस्तरीय शहद उत्पादक सहयोग समितियां गठित की गई हैं। राज्य स्तर पर बिहार राज्य शहद प्रसंस्करण एवं विपणन फेडरेशन का निबंधन भी कराया गया है। सहकारी उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आठ प्रमंडलस्तरीय मार्केटिंग यूनियनों का गठन किया गया है। मार्केटिंग फेडरेशन के गठन की प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा मार्केटिंग यूनियनों के लिए खाद के थोक व्यवसाय और ऑफ सीजन स्टोरेज की व्यवस्था विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।

स्कूली पाठ्यक्रम में सहकारिता को शामिल करने की पहल

सहकारिता आंदोलन के प्रति जागरूकता बढ़ाने और भावी पीढ़ी को इससे जोड़ने के लिए राज्य के स्कूली पाठ्यक्रम में ‘सहकारिता’ को एक विषय के रूप में शामिल करने की पहल की गई है। इस संबंध में शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र भेजा गया है। इसके साथ ही सहकारिता प्रशिक्षण केंद्र, पूसा को त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय, आनंद से संबद्धता दिलाने की दिशा में भी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। बैठक में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह, अपर निबंधक विकास कुमार बरियार, मनोज कुमार सिंह, संयुक्त निबंधक कामेश्वर ठाकुर, बाबू राजा, निकेश कुमार सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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