Bihar Sanskrit Education Board: बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने बोर्ड की ओर से किए गए कार्यों और उपलब्धियों की जानकारी दी तथा वार्षिक रिपोर्ट कार्ड राज्यपाल को सौंपा। मुलाकात के दौरान अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने राज्यपाल को मिथिला की पारंपरिक पहचान मिथिला पाग, मखान की माला और मिथिला पेंटिंग से सुसज्जित अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।
राज्यपाल को बोर्ड के कार्यों की दी जानकारी
अध्यक्ष ने पिछले एक वर्ष के दौरान बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की गतिविधियों की जानकारी राज्यपाल को दी। इसमें परीक्षा व्यवस्था, परिणाम प्रकाशन, विद्यालयों की स्थिति और संस्कृत शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयास शामिल रहे। उन्होंने बताया कि मध्यमा परीक्षा-2026 में पिछले वर्ष की तुलना में करीब दोगुने विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। बोर्ड ने परीक्षा परिणाम को निर्धारित समय सीमा में तैयार करते हुए महज 27 दिनों में मध्यमा परीक्षा-2026 का परिणाम जारी किया। बोर्ड के अनुसार, समय पर परिणाम जारी होने से विद्यार्थियों को आगे की शिक्षा और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में प्रवेश लेने में सुविधा हुई।
डिजिटल व्यवस्था पर भी दिया जोर
मृत्युंजय कुमार झा ने बोर्ड की डिजिटल व्यवस्था के बारे में भी राज्यपाल को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विद्यालयों और संबंधित अधिकारियों के साथ नियमित ऑनलाइन बैठकें आयोजित की जा रही हैं। बोर्ड के पोर्टल के माध्यम से परीक्षा, परिणाम और अन्य जरूरी सूचनाएं विद्यार्थियों, शिक्षकों और विद्यालयों तक समय पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
‘संस्कृत, संस्कृति और संस्कार’ को लेकर अभियान
अध्यक्ष ने बताया कि बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड का कार्य केवल परीक्षा और परिणाम तक सीमित नहीं है। बोर्ड ‘संस्कृत, संस्कृति और संस्कार’ के व्यापक उद्देश्य के साथ काम कर रहा है। राज्य के विभिन्न जिलों में संस्कृत विद्यालयों से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम लोगों को संस्कृत शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारत की ज्ञान परंपरा, संस्कृति और संस्कार से जुड़ी महत्वपूर्ण भाषा है। इसी उद्देश्य से संस्कृत विद्यालयों को अधिक सक्रिय और गुणवत्तापूर्ण बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
विद्यालयों और शिक्षकों की समस्याओं पर भी हुई चर्चा
मुलाकात के दौरान संस्कृत विद्यालयों, शिक्षकों और विद्यार्थियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा हुई। अध्यक्ष ने विद्यालयों की आधारभूत संरचना, शिक्षकों की समस्याओं और विद्यार्थियों को उपलब्ध सुविधाओं के बारे में राज्यपाल को जानकारी दी। उन्होंने सरकार की ओर से संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। इसमें लंबित वेतन भुगतान, संस्कृत विद्यालयों के लिए आवश्यक राशि, मॉडल स्कूलों और 50 विद्यालयों को 10+2 स्तर पर विकसित करने से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी गई। अध्यक्ष ने कहा कि संस्कृत विद्यालयों को आर्थिक और आधारभूत रूप से मजबूत किया जाना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
राज्यपाल ने कार्यों की सराहना की
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की ओर से किए जा रहे कार्यों पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने विशेष रूप से परीक्षा व्यवस्था में समयबद्धता, डिजिटल माध्यमों के उपयोग और विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी की सराहना की। राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण भाषा है। इसके संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयास महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड को आवश्यकता पड़ने पर राजभवन की ओर से हरसंभव सहयोग और मार्गदर्शन देने का आश्वासन दिया। साथ ही संस्कृत शिक्षा और संस्कृति से जुड़े बड़े कार्यक्रमों में अवसर मिलने पर स्वयं उपस्थित होकर विद्यार्थियों और शिक्षकों का उत्साह बढ़ाने की बात कही। मुलाकात के दौरान संस्कृत विद्यालयों को मजबूत बनाने, विद्यार्थियों और शिक्षकों की समस्याओं के समाधान तथा संस्कृत शिक्षा को व्यापक स्तर तक पहुंचाने सहित कई मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।

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