Bihar Sports AI, पटना: बिहार में खेल प्रतिभाओं की पहचान और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को वैज्ञानिक तरीके से बेहतर बनाने की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (BSSA) और IIT मद्रास के बीच 30 सितंबर 2026 को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुआ। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), खेल विज्ञान और उन्नत डेटा विश्लेषण की मदद से राज्य के खिलाड़ियों और स्कूली बच्चों की खेल क्षमता का आकलन किया जाएगा। इस पहल का खास फोकस बिहार के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान पर रहेगा। अधिकारियों के मुताबिक, ‘मशाल’ कार्यक्रम के तहत जुटाए गए आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर बिहार के लिए अपने खेल मानक तैयार किए जाएंगे।
मशाल कार्यक्रम के डेटा से तैयार होगा बिहार का अपना खेल मानक
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक-सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवीन्द्रण शंकरण ने बताया कि मशाल कार्यक्रम के तहत राज्यभर के स्कूली बच्चों से लंबाई, वजन, दौड़, कूद और फेंक समेत सात शारीरिक एवं प्रदर्शन संबंधी मानकों का डेटा जुटाया गया है। अब IIT मद्रास इस डेटा का उन्नत सांख्यिकी और AI तकनीक के जरिए विश्लेषण करेगा। इसके आधार पर बच्चों के लिए विकास एवं फिटनेस मानक, एथलेटिक क्षमता सूचकांक और जिला स्तर पर खेल प्रतिभाओं का मानचित्र तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही निर्णय लेने में मदद करने वाले डैशबोर्ड भी विकसित किए जाएंगे। इससे अलग-अलग जिलों में मौजूद खेल प्रतिभाओं की पहचान और उनके लिए जरूरी प्रशिक्षण संसाधनों की योजना बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
AI बताएगा खिलाड़ी की तकनीक और प्रदर्शन की कमियां
MoU का एक अहम हिस्सा भारोत्तोलन प्रशिक्षण से जुड़ा है। इसके तहत प्रशिक्षण केंद्र में AI आधारित सेंसर-रहित गति विश्लेषण प्रणाली स्थापित की जाएगी। कैमरों की मदद से विकसित यह तकनीक खिलाड़ी के शरीर पर कोई सेंसर लगाए बिना उसके प्रदर्शन का विश्लेषण करेगी। सिस्टम भार उठाने के दौरान खिलाड़ी की तकनीक, संतुलन और भार उठाने की दिशा जैसी गतिविधियों का आकलन करेगा। इससे कोचों को खिलाड़ी के प्रदर्शन का तत्काल और डेटा आधारित विश्लेषण मिल सकेगा। इसके आधार पर प्रशिक्षण को खिलाड़ी की जरूरत के मुताबिक अधिक सटीक बनाने में मदद मिलेगी।

गांवों की प्रतिभाओं तक पहुंचेगा वैज्ञानिक चयन
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के अनुसार, इस पहल से खेल प्रतिभाओं की पहचान केवल पारंपरिक चयन प्रक्रिया या अनुमान पर निर्भर नहीं रहेगी। आंकड़ों और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर खिलाड़ियों की क्षमता को समझने की कोशिश की जाएगी। जिला स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों से यह तय करने में भी सहायता मिल सकती है कि किन क्षेत्रों में प्रशिक्षण केंद्र, प्रशिक्षक और खेल संसाधनों की अधिक जरूरत है। BSSA के मुताबिक, बिहार के बच्चों के लिए बिहार में जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर वैज्ञानिक मानक तैयार करना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के प्रतिभाशाली बच्चों को अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं।

2036 ओलंपिक लक्ष्य से जोड़ा गया पहल का उद्देश्य
रवीन्द्रण शंकरण ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2036 ओलंपिक से जुड़े भारत के लक्ष्य, अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के जिम्मेदार AI उपयोग के सिद्धांतों और संशोधित खेलो इंडिया योजना में वैज्ञानिक प्रतिभा पहचान पर दिए जा रहे जोर को एक साथ जोड़ती है।उन्होंने कहा कि मशाल कार्यक्रम के जरिए बड़ी संख्या में बच्चों का डेटा जुटाया गया है और अब IIT मद्रास की AI तथा खेल विज्ञान विशेषज्ञता के साथ इसका इस्तेमाल वैज्ञानिक प्रतिभा पहचान और बेहतर प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा। IIT मद्रास के प्रो. महेश वी. पंचाग्नुला ने कहा कि मशाल कार्यक्रम से मिले व्यापक डेटा और संस्थान की AI व खेल विज्ञान विशेषज्ञता से ऐसा मॉडल तैयार किया जा सकता है, जिसे देश के दूसरे हिस्सों में भी अपनाया जा सके।
आगे दूसरे खेलों में भी लागू हो सकता है मॉडल
BSSA के अनुसार, शुरुआती स्तर पर विकसित मॉडल को भारोत्तोलन के अलावा भविष्य में अन्य खेलों में भी लागू किया जा सकता है। इसके लिए बच्चों की पहचान-रहित जानकारी का उपयोग किया जाएगा। प्राधिकरण के मुताबिक डेटा प्रबंधन में जिम्मेदार और सुरक्षित AI के सिद्धांतों का पालन किया जाएगा। डेटा, डैशबोर्ड, AI मॉडल और विकसित उपकरण BSSA की संपत्ति रहेंगे। MoU पर हस्ताक्षर के दौरान BSSA के महानिदेशक-सह-CEO रवीन्द्रण शंकरण, IIT मद्रास के प्रो. मनु संथानम, डीन (IC & SR), बाबजी श्रीनिवासन, प्रोफेसर एवं को-हेड CESSA, डॉ. महेश वी. पंचाग्नुला और BSSA के उप निदेशक हिमांशु सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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