रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल में बिहार का पहला सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट, मरीज को मिली नई जिंदगी

“बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि! पटना के रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल ने सफलतापूर्वक राज्य का पहला लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट संपन्न किया। छोटे भाई के समर्पण और डॉक्टरों की विशेषज्ञता ने एक नया जीवन बचाया है। अब बिहार में ही उपलब्ध हैं विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं।”

पटना : बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल ने राज्य का पहला सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट कर एक मरीज को नया जीवन प्रदान किया है। इस जटिल सर्जरी में छोटे भाई ने अपने बड़े भाई को लिवर का हिस्सा दान कर मानवता और पारिवारिक समर्पण की मिसाल पेश की।

31 वर्षीय मरीज को गंभीर लिवर फेल्योर की स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया था

आपको बता दें कि 31 वर्षीय मरीज को गंभीर लिवर फेल्योर की स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका बिलीरुबिन स्तर अत्यधिक (35 mg/dl) था तथा उन्हें पेट में पानी (एसाइटिस), छाती में तरल (प्ल्यूरल इफ्यूजन) और किडनी की गंभीर समस्या थी। चिकित्सकों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लिवर ट्रांसप्लांट को जीवनरक्षक विकल्प बताया। ऐसे में 23 वर्षीय छोटे भाई ने आगे आकर लिवर दान करने का निर्णय लिया।

यह जटिल सर्जरी करीब 9 घंटे तक चली और इसे डॉ. मिलिंद मांडवार (कंसल्टेंट, लिवर एवं किडनी ट्रांसप्लांट) और उनकी विशेषज्ञ टीम ने सफलतापूर्वक संपन्न किया। सर्जरी के बाद मरीज ने शीघ्र ही होश प्राप्त कर लिया, वेंटिलेटर सपोर्ट हटा दिया गया और 14 दिनों के भीतर बिना किसी जटिलता के उन्हें स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया गया। वहीं, डोनर को भी ऑपरेशन के छठे दिन सुरक्षित रूप से छुट्टी दे दी गई। डॉ. राजू बाबू कुशवाहा, कंसल्टेंट, मेडिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी ने बताया कि एंड-स्टेज लिवर डिजीज के मामलों में लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र प्रभावी उपचार होता है और कई बार यह मरीज के जीवन को बचाने का एकमात्र विकल्प बन जाता है।

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सफल ट्रांसप्लांट के लिए डोनर और रिसिपिएंट का सावधानीपूर्वक चयन अत्यंत आवश्यक होता है – डॉ. मिलिंद मांडवार

डॉ. मिलिंद मांडवार ने कहा कि सफल ट्रांसप्लांट के लिए डोनर और रिसिपिएंट का सावधानीपूर्वक चयन अत्यंत आवश्यक होता है। आधुनिक तकनीकों के कारण अब लिवर ट्रांसप्लांट की सफलता दर 95 फीसदी से अधिक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि डोनर की पूरी जांच के बाद ही सर्जरी की जाती है और डोनर सामान्य जीवन बिना किसी दीर्घकालिक दवाओं के जी सकता है। वहीं, रिसिपिएंट को शुरुआती तीन महीनों तक विशेष सावधानी और नियमित फॉलो-अप की आवश्यकता होती है।

यह सफलता बिहार में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की दिशा में एक बड़ा कदम है – डॉ. सत्यजीत कुमार

इस उपलब्धि पर रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. सत्यजीत कुमार सिंह ने कहा कि यह सफलता बिहार में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि रुबन हॉस्पिटल हमेशा से नई तकनीकों और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को बिहार में सबसे पहले शुरू करने में अग्रणी रहा है और यह उपलब्धि उसी निरंतर प्रयास का परिणाम है।

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‘ब्रेन-डेड मरीजों से अंगदान को बढ़ावा देने के लिए मेडिकल कॉलेज, ट्रॉमा और न्यूरोलॉजिकल सेंटरों की महत्वपूर्ण भूमिका है’

साथ ही उन्होंने अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि ब्रेन-डेड मरीजों से अंगदान को बढ़ावा देने के लिए मेडिकल कॉलेज, ट्रॉमा और न्यूरोलॉजिकल सेंटरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंगदान के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है। रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल द्वारा शुरू किया गया लिवर ट्रांसप्लांट कार्यक्रम राज्य में विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक मजबूत पहल है। यह उपलब्धि बिहार में ऑर्गन ट्रांसप्लांट और उन्नत सर्जरी के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत का संकेत देती है।

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