BJP का नारा सबका साथ नहीं जो मेरे साथ सिर्फ उसका विकास, सुप्रियो का करारा जवाब

Ranchi : झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रीयो भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि BJP को करारा जवाब दिया है। राज्य के माहौल में अब जहर की बू आनी शुरू हो गई है। जिस भाषा का प्रयोग भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेताओं के द्वारा किया जा रहा है इससे यही लगता है कि वे मुद्दाविहीन और तर्कविहीन हो गए हैं। यही भाजपा की सोच है वह सोच जब सामने आ रहा है और उसी बात को उनके नेता सीधा कर देते हैं और प्रधानमंत्री कहते हैं कि सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास लेकिन उनके नेता का कहना है कि सबका साथ नहीं जो मेरे साथ सिर्फ उसका विकास।

अब तो बीजेपी सभी जानते हैं कि लोकसभा चुनाव में उन्होंने एक भी मुसलमान उम्मीदवार नहीं उतरा था ना विधान सभा में उतरते हैं। केवल राजस्थान में एक सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे उसके अलावा पूरे देश में 20% आबादी रिप्रेजेंटेशन नहीं दिया जाता है। क्या बातें उनके पहले से भी स्थापित है लेकिन सीधा कह देना कि अब अल्पसंख्यक मोर्चा का जरूरत नहीं है इसको बंद कर देना चाहिए। यहां आकर सिर्फ तो बातें कहते हैं।

यूपी में 16513 मदरसा है जबकि एमपी में 2650

BJP के पास 10 वर्षों से सीमा सुरक्षा का जिम्मा है। असम के मुख्यमंत्री भी कहते हैं कि हमारे राज्य में भी घुसपैठी होता है, लेकिन झारखंड आकर घुसपैठियों को लेकर कहते हैं और बाबूलाल मरांडी हर दिन ट्वीट करते हैं। यहां आकर कहते हैं मदरसा बंद होना चाहिए, मदरसा के अंदर जो तालीम दी जाती है वो धार्मिक तालीम दी जाती है वह किसी से छुपी हुई नहीं है। यूपी में 16513 मदरसा है जो रिकॉग्नाइज है और जो रिकॉग्निस नहीं है वह 8449 है। एमपी में 2650 मदरसा जो राज्य सरकार के ग्रांट के द्वारा चलते है 1600 सेंट्रल ग्रांट में चलते है गुजरात में 1130 मदरसा हैं 30 वर्षो से बीजेपी की शासन है।

झारखंड में 1046 मदरसा है। अपने राज्य को नहीं देखते हैं और झारखंड में मदरसा बंद करने की बात कहते हैं, क्या झारखंड के मदरसा से कुछ ऐसा चीज निकला है। कैसे बातें होती है क्या जो इस देश और राज्य के लिए नुकसानदायक है। हमारे जो गुरुकुल है जो संस्कृत विद्यालय महाविद्यालय हैं वहां पर भी पढ़ाई होती है लेकिन यह कैसा तमाशा है? कि आपके पास मुद्दे नहीं है तो आपस में लड़ाने का काम कर रहे हैं।

घुसपैठ बोल-बोल कर आदिवासी का अपमान करते हैं। असम के जो आदिवासी है जो चाय बागानों में रहते है उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा कब देंगे? वह हमारे लोग है झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओड़िशा से गए हुए हैं उन्हें आप लोग tea tribe कहते हैं, अनुसूचित जनजाति क्यों नहीं कहते हैं? आदिवासी का सम्मान हेमंता बिस्वा सरमा को बताना चाहिए कि लोकसभा का नींव रखा जा रहा था तो दलित राष्ट्रपति को क्यों नहीं बुलाया गया?

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हेमंत का नाम सुनते हेमंता का हिम्मत खत्म हो जाता है

भारत रत्न देने के लिए आडवाणी जी का घर चुना गया। राष्ट्रपति गई वहां बुजुर्ग व्यक्ति है उनके सम्मान में उनको अंग वस्त्र पहनाया गया मांग पत्र दिया गया, खुद खड़ी रही और प्रधानमंत्री बैठे रहे। सिर्फ और सिर्फ हेमंत सोरेन से चीड़ है, हेमंत का नाम सुनते हेमंता का हिम्मत खत्म हो जाता है। हेमंत का नाम सुनते ही बाबूलाल मरांडी उछल के पेड़ में चढ़कर ट्वीट कर देते है की देखिए मुख्यमंत्री आदिवासियों के साथ क्या कर रहे है।

बाबूलाल मरांडी आपको तो मुख्यमंत्री का चेहरा भी नहीं बनाया जाएगा क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झारखंड का अतिरिक्त मुख्यमंत्री का प्रभार लेंगे। एक को राज्यपाल बनाकर उड़ीसा भेजा, तो बेटे का कारनामा सबको पता है। हेमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि मैं यहां रहने नहीं आया हूं मैं चला जाऊंगा, कांग्रेस ने आपको आगे किया और आज आप भाजपा के प्रवक्ता बन गए हैं। शारदा में सुवेंदु अधिकारी था वह भाजपाई बन गया को भ्रष्टाचार झारखंड में दिखता है। घृणा का बीज यहां बोया जा रहा है। भाजपा के कार्यकर्ताओं से अपील करूंगा कि आप सबको और हमको आपस में मिलकर रहना है यह आग लगाने वाले लोग आएंगे,आग लगाएंगे,चले जाएंगे नुकसान हमारा होगा।

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