लखनऊ : यूपी में बजट सत्र शुरू, हंगामे के बाद स्थगित सदन दोबारा चालू…। यूपी में विधानसभा का बजट सत्र मंगलवार से शुरू हो गया। इस वर्ष का ये पहला सत्र है। पिछले एक वर्ष का सबसे लंबा सत्र होगा जो 5 मार्च तक चलेगा। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण से सदन की कार्यवाही शुरू हुई।
प्रतिपक्षा सपा विधायकों के जोरदार हंगामे के चलते राज्यपाल के अभिभाषण के बाद सदन को दोपहर 12.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। दोबारा वंदेमातरम के गायन के साथ सदन चालू हो गया है।
इससे पूर्व बजट सत्र शुरू होने से पहले मंगलवार को सपा कार्यकर्ताओं ने हाथों में गगरी और तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। गगरी में लिखा कि यह नैतिकता का अस्थि कलश है। वहीं तख्तियों में विभिन्न नारे लिखकर भाजपा पर प्रदेश में भाईचारा मिटाने का आरोप लगाया।
नेता प्रतिपक्ष बोले – अधूरा पढ़ा गया अभिभाषण…
विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने से पहले सपा कार्यकर्ताओं चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के पास बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने हाथों में नारे लिखी तख्तियां लेकर हंगामा शुरू कर दिया। इसमें सपा विधायक एवं विधान परिषद सदस्य शामिल रहे। सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हो गई।
विधान सभा व विधान परिषद के सदस्य विधानसभा में मौजूद रहे। राज्यपाल के अभिभाषण के बाद औपचारिक कार्य, अध्यादेश, अधिसूचना, नियम आदि सदन के पटल पर रखे जाने थे।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और सपा नेता माता प्रसाद पांडे ने बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर कहा कि –‘उनके अभिभाषण में जो पढ़ा जा रहा था, समाजवादी पार्टी ने उसका विरोध किया। क्योंकि, उसमें झूठे आंकड़े दिए गए थे। मांग हो रही थी कि महाकुंभ की भगदड़ में जो मौतें हो रही हैं, उसके सही आंकड़ों को बताया जाए।
…राज्यपाल आधा भाषण छोड़कर चली गईं। हमें लगता है कि वे महाकुंभ में हुई घटनाओं से दुखी थीं, इसलिए उन्होंने पूरे भाषण को पढ़ा ही नहीं।’

बोले केशव प्रसाद मौर्य – विपक्ष का रवैया गैरजिम्मेदाराना…
19 फरवरी को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी। 20 फरवरी को वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना बजट पेश करेंगे। इसके बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी।सत्र में हंगामे के आसार हैं। माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष प्रयागराज महाकुंभ और मिल्कीपुर उपचुनाव को लेकर सत्ता पक्ष को घेरने का प्रयास करेगा।
वहीं सत्ता पक्ष ने भी पलटवार की पूरी रणनीति बना ली है। दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर कहा कि –‘…विपक्ष का आचरण गैर-जिम्मेदाराना है। राज्यपाल के अभिभाषण के माध्यम से प्रदेश में जो सरकार काम कर रही है, उसकी जानकारी दी जाती है।
…समाजवादी पार्टी का आचरण सदा ऐसा ही रहा है कि वे महामहिम राज्यपाल का आदर करने के बजाय हल्लाबोल करते हैं। समाजवादी पार्टी ने यह दिखा दिया कि वे एक जिम्मेदार राजनीतिक दल कम और अराजकता फैलाने वाला दल ज्यादा है।’
संसदीय कार्य मंत्री एवं वित्त मंत्री मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि – ‘विपक्ष का बहुत ही गैर-जिम्मेदाराना रवैया है। इनका काम विरोध करना है, ये हर बात में नेगेटिव सोचते हैं।’
मंत्री दयाशंकर सिंह ने विधानसभा बजट सत्र के दौरान विपक्ष के विरोध पर कहा कि- ‘विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है। विपक्ष के लिए सदन एक अवसर होता है। सदन में वे अपनी बातों को उठा सकते हैं, लेकिन विपक्ष पास कोई मुद्दा ही नहीं है। इसलिए, वे जो हो रहा है, उसका विरोध कर रहे हैं।’

सत्र शुरू होने से पहले पहले सीएम योगी ने विपक्ष को घेरा…
मंगलवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण से सदन की कार्यवाही शुरू हुई। सरकार 20 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आम बजट पेश करेगी। इस बार के बजट का आकार 8 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है।
वहीं, विपक्ष द्वारा महाकुंभ हादसे समेत कई मुद्दों को उठाए जाने की रणनीति को देखते हुए दोनों सदनों में हंगामे के आसार हैं। वहीं सत्ता पक्ष ने भी विपक्ष को करारा जवाब देने के लिए कमर कसे हुए हैं।

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट सत्र पर कहा कि –‘आज विधानमंडल की कार्यवाही प्रारंभ होने के साथ ही राज्यपाल द्वारा सदन को संबोधित किया जाएगा। इसके बाद कल से राज्यपाल के अभिभाषण पर सदन में चर्चा भी होगी। 20 फरवरी को सदन में उत्तर प्रदेश का वर्ष 2025-26 का आम बजट पेश किया जाएगा।
…सत्र 18 फरवरी से 5 मार्च तक प्रस्तावित किया गया है। उत्तर प्रदेश के इतिहास में ऐसे बहुत कम अवसर आए हैं जब इतने लंबे समय तक सत्र आहूत किया गया हो। लेकिन सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से संपन्न हो, यह केवल सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि विपक्ष की भी उतनी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

…सदन चर्चा परिचर्चा का एक मंच बने। पिछले करीब 8 वर्षों में डबल इंजन वाली भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश के विकास के जो मानक स्थापित किए हैं, वे अभूतपूर्व हैं। इसकी झलक अभिभाषण के साथ-साथ सदन के अंदर चर्चाओं के जरिए भी देखने को मिलती है…।
..स्वाभाविक रूप से हताश और निराश विपक्ष इन मुद्दों पर चर्चा करने से भागने की कोशिश करता है और इसमें बाधाएं खड़ी करने की कोशिश करता है सदन की कार्यवाही में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है। अगर विपक्ष सार्थक चर्चा को आगे बढ़ाने में मदद करता है, तो मेरा अनुमान है कि यह सत्र बहुत अच्छा हो सकता है।’
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