जनार्दन सिंह की रिपोर्ट
डिजीटल डेस्क : Cabinet Decision – वाराणसी के राजघाट पर बनेगा सबसे बड़ा रेल-रोड पुल, मौजूदा मालवीय पुल बनेगा इतिहास। ‘मां गंगा ने बुलाया है…’ प्रधानमंत्री बनने से पहले वाराणसी में लोकसभा चुनाव का नामांकर करने वाले नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में यह बात कही थी। यह बात सियासी हलके और जनमानस के बीच आज भी रह-रहकर गूंजती है।
वर्ष 2024 के चुनाव में अनपेक्षित ढंग से महज करीब डेढ़ लाख के वोट से जीत हासिल कर कर तीसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट ने अब उसी पतितपावनी गंगा पर आरपार आने-जाने के लिए नई सौगात दी है।
राजघाट पर मौजूदा मालवीय पुल निकट भविष्य में इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा और जल्द ही उसके स्थान पर सबसे बड़ा नया रेल-रोड पुल निर्मित होगा। इस एक ही पुल पर दौड़ेंगे मालवीय पुल की ही भांति ट्रक-ट्रेन और कार आदि साथ दौड़ेंगे।
यानी यह मल्टीट्रैकिंग मोड वाला होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्रीय कैबिनेट इसकी मंजूरी दे दी है।
137 साल पुराने मालवीय पुल का स्थान लेगा 2,642 करोड़ का नया पुल
आध्यात्मिक नगरी वाराणसी में गंगा नदी पर एक रेल-रोड ब्रिज समेत मल्टीट्रैकिंग के निर्माण को दी गई कैबिनेट की मंजूरी की जानकारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को दी।
उन्होंने बताया कि –‘ये पुल उत्तर प्रदेश के दो जिलों वाराणसी और चंदौली को जोड़ेगा। साथ ही लॉजिस्टिक कॉस्ट में कटौती करेगा। अनुमान है इस पुल पर चलने वाली गाड़ियां, ट्रक और ट्रेनों में इस्तेमाल होने वाले कई सौ करोड़ रुपयों की सालाना डीजल की भी बचत होगी।
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत इस परियोजना का डीपीआर 2 साल में बनकर तैयार होगा। इस रेल-रोड पुल में रेलवे के 4 ट्रैक होंगे और उसके ऊपर 6 लेन का हाईवे बनेगा। नया पुल पहले से मौजूद मालवीय पुल के बगल में ही बनाया जाना है।
मालवीय पुल देश के सबसे पुराने पुलों में से है और यह 137 साल पुराना है। नया पुल पुराने मालवीय पुल को रिप्लेस करेगा। यह देश का सबसे बड़ा मल्टी ट्रैकिंग पुल होगा।
इस पुल से प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिलेगी और परिवहन लागत भी कम होगा। नए पुल से करीब 149 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाई आक्साईड के उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलने का अनुमान है जो 6 करोड़ पेड़ों को लगाने के बराबर होगा।’

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव
नए मल्टी ट्रैकिंग गंगा-पुल पर होगी 24 मिलियन टन अतिरिक्त कार्गो की आवाजाही
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आगे बताया कि – ‘पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को रेल मंत्रालय के रोड-रेल पुल वाली इस परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 2,642 करोड़ रुपये होगी।
इस परियोजना के पूरा होने से भीड़भाड़ और ट्रैफिक की समस्या को कम किया जा सकेगा। इस पुल में दो तल होंगे। पहले तल पर 4 रेलवे ट्रैक होंगे जिन पर वंदे भारत ट्रेन से लेकर लॉजिस्टिक ट्रेन तक गुजरेग। साथ ही, दूसरे तल पर 6 लेन की सड़क बनाई जाएगी।
इस रोड-कम-ट्रेन पुल पर 24 मिलियन टन अतिरिक्त कार्गो आवाजाही कर सकेगा’।
माना जा रहा है कि कई माह पहले गुजरात के मोरबी में पुराने पुल के धराशाई होने की घटना ने प्रधानमंत्री को झकझोर कर रख दिया था।
वाराणसी के मालवीय पुल की उम्र पूरी हो जाने और उसके जर्जर हाल के बारे में लगातार सूचनाएं भी पहुंच रही थीं। उसी क्रम में इस संबंध में काफी गहन मंथन और मंत्रणा के बाद परियोजना को अंतिम रूप दिया गया है।

नए पुल से लोगों के बचेंगे सालाना 638 करोड़ रुपये, सीएम योगी ने पीएम मोदी का जताया आभार
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि- ‘इस परियोजना से रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इस पुल के निर्माण के दौरान लगभग 10 लाख मानव दिवस का सीधा रोजगार पनपेगा। साथ ही इससे भारतीय रेलवे का मौजूदा नेटवर्क लगभग 30 किलोमीटर बढ़ जाएगा।
गंगा नदी पर बनने वाले नए पुल से रास्ता आसान और बेहतर होने के चलते लोगों के डीजल की भी काफी बचत हो सकेगी। इस पुल से सालाना 8 करोड़ लीटर डीजल सेव होने का अनुमान है जिसका मतलब है कि लोगों के 638 करोड़ रुपये बचेंगे। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि होगी।
इस पुल का डिजाइन और निर्माण काफी मुश्किल है। इसीलिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनने में 2 साल का समय लग सकता है’।
केंद्रीय कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी मिलते ही यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। सीएम योगी ने कहा – ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के यशस्वी मार्गदर्शन में पावन नगरी काशी विकास के नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है।
इस विकास यात्रा को और गति प्रदान करते हुए आज केंद्रीय कैबिनेट द्वारा वाराणसी में गंगा नदी पर रेल-सह-सड़क पुल व वाराणसी-पंडित दीन दयाल उपाध्याय मल्टीट्रैकिंग के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई है।
क्षेत्र के चहुंमुखी विकास के साथ ही यह परियोजना वाराणसी और चंदौली के लोगों के लिए आत्मनिर्भरता के नए मार्ग भी प्रशस्त करेगी। इस लोक-कल्याणकारी निर्णय हेतु प्रधानमंत्री जी का हार्दिक आभार’।
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