आदिवासियों का एक बार ही बनेगा जाति प्रमाण पत्र, टीएसी की बैठक में लिया गया फैसला

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड जनजातीय परामर्शदातृ परिषद (टीएसी) की दूसरी बैठक हुई

बैठक में 11 बिंदुओं पर हुई चर्चा, कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए

जनजातीय समुदाय का सर्वांगीण विकास टीएसी का मुख्य उद्देश्य

अवैध मानव व्यापार में संलिप्त लोगों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करें

रांची : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में आज झारखंड मंत्रालय स्थित सभागार में झारखंड जनजातीय परामर्शदातृ परिषद (टीएसी) की दूसरी बैठक संपन्न हुई. बैठक में कई मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया. मौके पर अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री-सह-उपाध्यक्ष श्री चम्पाई सोरेन भी उपस्थित थे.

बैठक में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य में जनजातीय समुदाय के लोगों को अधिक से अधिक जाति प्रमाण पत्र निर्गत हो इस हेतु सरकार प्रतिबद्ध है. बैठक में जनजातीय समुदाय के लोगों को जीवन काल में एक ही बार जाति प्रमाण पत्र निर्गत किए जाने के प्रस्ताव पर सहमति बनी. अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों को जाति प्रमाण पत्र बनाने में हो रही दिक्कतों को देखते हुए जीवन में एक बार जाति प्रमाण पत्र निर्गत किये जाने का निर्णय लिया गया इससे लोगों को जाति प्रमाण पत्र बनाने में सहूलियत होगी. बैठक में झारखंड राज्य गठन के समय राज्य में सरना, मसना, कब्रिस्तान आदि जो अवस्थित थे यदि उनके अभिलेख उक्त रूप में न भी हों तो ग्राम सभा और अंचल कार्यालय से उसकी संपुष्टि कराते हुए हुए उनकी घेराबंदी कराए जाने की अनुशंसा समिति ने की.

जनजातीय समुदाय के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण इकाई है टीएसी : मुख्यमंत्री

बैठक में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि जनजातीय परामर्शदातृ परिषद (टीएसी) राज्य के जनजातीय समुदाय के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण इकाई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि टीएसी जनजातीय वर्गों के सभी महत्वपूर्ण विषय जैसे आर्थिक, सामाजिक शैक्षणिक एवं समुदाय से जुड़े अन्य विकास के मुद्दों पर चर्चा करती है. जनजातीय समुदाय का उत्थान और विकास अधिक से अधिक कैसे हो, इस पर टीएससी कड़ियों को जोड़ने का कार्य कर रही है. जनजातीय समुदायों के बेहतरी के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है. बैठक में समिति ने झारखंड राज्य में जनजातीय समुदाय के लोगों के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार से संविधान की अनुसूची 05 के आदिवासी राज्यों को देश के उत्तर पूर्व के राज्य जो संविधान के अनुसूची 6 के अंतर्गत आते हैं, के समान उद्योग लगाने एवं करों आदि में दी जाने वाली सुविधाओं के अनुरूप सुविधा दिए जाने की अनुशंसा की.

स्टीफन मरांडी की अध्यक्षता में एक उप समिति का गठन

बैठक में विधायक प्रो. स्टीफन मरांडी की अध्यक्षता में एक उप समिति का गठन किया गया. इस उप समिति में विधायक दीपक विरूवा, बंधु तिर्की, भूषण तिर्की एवं चमरा लिंडा सदस्य होंगे. यह उप समिति अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों को कृषि ऋण, गृह ऋण तथा शिक्षा ऋण सहित अन्य ऋण बैंकों के माध्यम से सुलभ तरीके से उपलब्ध कराने, विभिन्न बैंकों के साथ विचार विमर्श कर ऋण उपलब्ध कराने के लिए नियमों में सुधार तथा राज्य में अनुसूचित जनजाति धारित पूर्व एवं वर्तमान भूमि अधिग्रहण का गहन अध्ययन कर टीएसी को रिपोर्ट सौपेंगी. इस संबंध में उप समिति टीएसी को परामर्श भी देगी.

टीएससी का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से करेगा मुलाकात

बैठक में सरना धर्म कोड लागू किए जाने के संबंध में यह निर्णय लिया गया कि टीएससी जल्द ही सरना कोड दिए जाने के पहलुओं पर एक प्रस्ताव तैयार कर राज्यपाल के माध्यम से इसे राष्ट्रपति को भेजेगी. बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में टीएससी का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेगा.

अवैध मानव व्यापार पर रोक लगाने के लिए निर्देश

बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी की वीर-शहीदों तथा झारखंड आंदोलन के शीर्ष नेतृत्वकर्ताओं के बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार तथा स्कूलों के पाठ्यक्रमों में भी शामिल करने के संबंध में विचार कर कार्य योजना तैयार की जाएगी. बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अवैध मानव व्यापार पर रोक लगाने के लिए गृह, कारा विभाग को कठोर कानून बनाने तथा निरंतर मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया. टीएसी के सभी सदस्यों ने मानव व्यापार को लेकर चिंता जाहिर की तथा दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई किए जाने पर बल दिया. बैठक में बताया गया कि अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों के खिलाफ होने वाले अत्याचार के संबंध में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है. इस समिति के माध्यम से सभी प्रकार के अत्याचार एवं शोषण से संबंधित मामलों की समीक्षा कर कार्रवाई हेतु अनुशंसा की जाती है.

ट्राईबल यूनिवर्सिटी का जल्द होगा संचालन

बताया गया कि जनजातीय भाषा-संस्कृति-ज्ञान आदि को सहेजने एवं विकसित करने एवं जनजातीय समुदाय के विकास हेतु शोध करने के उद्देश्य से राज्य में एक ट्राईबल यूनिवर्सिटी जमशेदपुर में स्थापित की जा रही है। जल्द ही एक्ट बनाकर यूनिवर्सिटी का संचालन किया जाएगा।

बैठक में इन बिंदुओं पर हुई चर्चा

▪️ जाति प्रमाण पत्र बनाने में जनजातीय समुदायों को बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कार्मिक विभाग इस संबंध में अधिसूचना निर्गत करने पर विचार करे जिससे कि जीवन काल में एक बार जनजातीय समुदायों के लोगों को जाति प्रमाण पत्र बनाना पड़े जो कि जीवन भर उपयोग में लाया जा सके.

▪️ जनजातीय समाज के लोगों को बैंकों से ऋण लेने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. जनजातीय समाज के लोगों के लिए व्यवस्था ऐसी करनी चाहिए जिससे कि वित्तीय संस्थान उन्हें ऋण देने से मना नहीं करें. वित्त विभाग सभी बैंको से इस संबंध में विस्तृत चर्चा कर सुधार लाने की कार्रवाई करे.

▪️ जनजातियों के भूमि के अवैध हस्तांतरण पर रोक लगना चाहिए.

▪️ सरना धर्म कोड को मान्यता दिलवाने को लेकर आगे की कार्यवाही एवं रणनीति पर विचार-विमर्श.

▪️ विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों के द्वारा जनजातियों के जमीन अधिग्रहण एवं उनके विस्थापन पर एक शोध की आवश्यकता है. शोध के साथ-साथ एक सशक्त पुनर्स्थापन नीति बनाई जाए। इस संबंध में पुनर्स्थापन आयोग का गठन किया जाए.

▪️ अवैध मानव व्यापार को रोकने हेतु ठोस कदम उठाने की जरूरत है। आदिवासी महिलाओं/लड़कियों के अवैध व्यापार एवं शोषण के विषय पर कठोर कार्रवाई की जरूरत है.

▪️ अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों के खिलाफ होने वाले अपराध का विशेष पुनरीक्षण की आवश्यकता है. ऐसी परिस्थिति में उन्हें मिलने वाले लाभ/सहायता के विषय में कल्याण एवं गृह विभाग अगली बैठक में विस्तृत रिपोर्ट समर्पित करेगा.

▪️ जनजातीय समुदाय के लोगों के बीच उद्यमियों का घोर अभाव है. ऐसी स्थिति में अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवकों/युवतियों के द्वारा अपना उद्यम प्रारम्भ करवाने हेतु विशेष प्रोत्साहन योजना की जरूरत है. इस समुदाय के उद्यमियों को विभिन्न शुल्क यथा CGST/IGST/Income Tax आदि में छूट देने हेतु प्रस्ताव भारत सरकार को भेजना चाहिए.

रिपोर्ट : मदन सिंह

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