चतराः जनप्रतिनिधियों की लापरवाही का दंश आम जनता झेल रही है. इसकी बानगी देखनी है तो चतरा आइए. भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत 2019 में करोड़ों रुपए खर्च कर प्रतापपुर प्रखंड के लिप्ता धोई नदी पर एक पुल निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया था. 4 साल बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका. ऐसे में पुल निर्माण कार्य करा रहे संवेदक के प्रति ग्रामीणों में काफी आक्रोश है.
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पुल निर्माण नहीं होने से ग्रामीण परेशान
धोई नदी पर पुल निर्माण का मुख्य उद्देश्य नक्सलियों के मांद तक आसानी से पुलिस का पहुंचना था, ताकि नक्सलियों के नापाक मंसूबे पर पानी फेरा जा सके.
लेकिन आज तक पुल का निर्माण संवेदक सहाय कंस्ट्रक्शन का भेट चढ़ा हुआ है. लिहाजा करोड़ों रुपए तो खर्च हो गए, लेकिन लोगों की परेशानी जस के तस बनी हुई है.

मानसून के दिनों में गांव टापू बन जाता है
बारिश के दिनों में जब धोई नदी में बाढ़ आती है, तो पूरा गांव टापू में तब्दील हो जाता है. एक गांव का संपर्क दूसरे गांव से कट जाता है. बच्चे स्कूल नहीं जा पाते है, हाट बाजार से लेकर अन्य सभी प्रकार की आवाजाही ठप हो जाती है. पुल का शिलान्यास बड़ा ही ताम-झाम के साथ नेता और कार्यकर्ता के सहयोग से 2019 में किया गया. 2020 में पुल बनाकर तैयार भी करना था, लेकिन धोई नदी का पुल 4 साल बीत जाने के बाद भी पुल को जोड़ने वाली एप्रोच सड़क का निर्माण सहित कई कार्य अधूरा पड़ा हुआ है. लिहाजा लोगों की समस्या जस के तस बनी हुई है.
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