कटिहार : कटिहार के फलका थाना क्षेत्र स्थित मोरसंडा कमला नदी से एक मृत डॉल्फिन मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मछली मारने गए स्थानीय लोगों ने नदी में तैरता विशाल जलीय जीव देखा तो पहले किसी बड़ी मछली का अनुमान लगाया लेकिन पास जाने पर पता चला कि वह विलुप्त प्रजाति में शामिल गंगा डॉल्फिन है। स्थानीय लोगों के अनुसार डॉल्फिन का वजन करीब एक से डेढ़ कुंटल के बीच बताई जा रहा है।
डॉल्फिन पूरी तरह मृत नहीं था बल्कि अधमरा अवस्था में नदी की दूसरी ओर पाया गया था – ग्रामीण
ग्रामीणों का दावा है कि डॉल्फिन पूरी तरह मृत नहीं था बल्कि अधमरा अवस्था में नदी की दूसरी ओर पाया गया था। मोरसंडा के निवासी खंतर ऋषि बताते हैं कि शुरुआती स्थिति में डॉल्फिन की सांसे चल रही थी कुछ मछुआरे उसे बचाने की कोशिश कर रहे थे। ताकि वह दोबारा पानी में लौट सके लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि हाल के दिनों में नदी में मछली मारने के लिए जहर डालने की शिकायतें बढ़ी है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि जहरीले पानी के कारण ही डॉल्फिन की मौत हुई होगी।
डॉल्फिन का मिलन पूरे इलाके के लिए चिंता का विषय है – वार्ड सदस्य अजय कुमार
वार्ड सदस्य अजय कुमार ने कहा कि डॉल्फिन का मिलन पूरे इलाके के लिए चिंता का विषय है। कमला नदी में जलीय जीवों की संख्या पहले ही कम होती जा रही है। यदि कोई समूह मछली मारने के लिए जहर का इस्तेमाल कर रहा है तो यह गंभीर अपराध है। वन विभाग को इसकी गहन जांच करनी चाहिए। गौरतलब है कि डॉल्फिन राष्ट्रीय जलीय जीव है और इसके शिकार या नुकसान पहुंचने पर सख्त कानूनी प्रावधान है। डॉल्फिन का मिलन अपने आप में दुर्लभ घटना है और उसकी मौत से पर्यावरण विशेषज्ञों तक चिंता बढ़ी है।
ग्रामीणों ने सूचना वन विभाग तक पहुंचा दिया है, अब पोस्टमार्टम के जरिए मौत के कारणों की पुष्टि होने की उम्मीद है
ग्रामीणों ने सूचना वन विभाग तक पहुंचा दिया है और अब पोस्टमार्टम के जरिए मौत के कारणों की पुष्टि होने की उम्मीद है। डॉल्फिन संरक्षण को लेकर सरकारी स्तर पर तमाम अभियानों के बावजूद नदी क्षेत्र में ऐसे हादसे कई सवाल खड़े करते हैं। क्या नदी में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। क्या अवैध तरीके से मछली पकड़ने का कारोबार सक्रिय है और सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन सख्त कदम उठाएगी। इलाके में फिलहाल इसी को लेकर चर्चा जारी है।
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रतन कुमार की रिपोर्ट
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