Ranchi– भोजपुरी मगही मैथिली अंगिका मंच के अध्यक्ष कैलाश यादव ने कहा है कि शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो द्वारा कुछ क्षेत्रों से भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका और उर्दू हटाने की मांग करना असंवैधानिक है.क्योंकि पिछली रघुवर सरकार द्वारा विधान सभा से पारित कर इन भाषाओं को मान्यता दी गयी है. और तब ही इन भाषाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल किया गया है.
झारखण्ड राज्य बने 22 वर्ष हो गए, लेकिन पहले किसी दलों ने क्षेत्रीय भाषा का विरोध नहीं किया, जबकि पिछली सरकार द्वारा वर्ष 2017-18 में उक्त भाषाओं को विधानसभा से पारित किया गया था, तब जेएमएम कांग्रेस,आजसू व अन्य पार्टियों के इसका विरोध नहीं किया था. लेकिन शिक्षा मंत्री और जेएमएम नेता जगरनाथ महतो द्वारा भाषायी विवाद पैदा किया जा रहा है.
कैलाश यादव ने कहा कि झारखंड में कभी भी स्थानीय नियोजन नीति के लिए 1932 का खतियान को आधार नहीं माना जा सकता. स्थानीय नियोजन नीति का आधार राज्य का स्थापना वर्ष 15 नवंबर 2000 ही मान्य होगा. या छत्तीसगढ़, उत्तराखंड के मापदंड को अपनाना होगा. यदि जनभावना में किसी सरकार द्वारा इसे हटाया गया तो राज्य में अशांति आयेगी.
रिपोर्ट- शाहनवाज