जब अवसर मिला तो बदली तकदीर, जीविका दीदियों की प्रेरक गाथा

पटना : राज्य के कटिहार जिले के मनिहारी प्रखंड की रहने वाली जीविका दीदी फुलमुनी मुर्मू की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। मनिहारी प्रखंड के छोटे से गांव की रहने वाली फुलमुनी मुर्मू का पूरा परिवार शराब बनाने व बेचने का काम किया करता था। राज्य में शराबबंदी लागू होने के बाद मुर्मू और उनके पति दूसरों की खेत में मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण मुश्किल से कर पा रहे थे। कभी-कभी दीदी व उनके पति को काम भी नहीं मिलता था, जिसकी वजह से उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। इसी बीच उनके पति गंभीर रूप से बीमार हो गये और परिवार की हालत और बदतर हो गयी। इन्हीं परेशानियों के बीच फुलमुनी देवी ने अपने गांव की जीविका समूह से जुड़कर बचत करना सीखा। कुछ दिन बाद उनको समूह के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा विधि के तहत सहायता राशि मिली, जिसके कारण अपने बीमार पति का इलाज सही से करवा पाई।

पारंपरिक रूप से शराब व्यवसाय से जुड़े परिवारों के लिए सतत् जीविकोपार्जन योजना शुरू की

इसके पश्चात पारंपरिक रूप से शराब व्यवसाय से जुड़े परिवारों के लिए सतत् जीविकोपार्जन योजना शुरू की। इस योजना के संचालन की जिम्मेदारी जीविका दीदियों को दी गयी। जिसके तहत फुलमुनी को 20 हजार की सहायता राशि मिली, जिससे साईकिल मरम्मत का सामान खरीद कर साईकिल रिपेरिंग के दुकान खोली गई। जिससे फुलमुनी को प्रतिदिन 200 से 300 रुपए की कमाई होती है। आज फुलमनी अपने गांव में ही खुशहाल जीवन बीता रही है। अब वे ज्यादा पूंजी लगाकर इस दुकान को और बड़ा करना चाहती है और अपने दोनों बच्चे को शिक्षित कर उनका भविष्य सुधारना चाहती हैं।

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पूर्णिया की मीना की कहानी

पूर्णिया के धमदाहा प्रखंड की रहने वाली 48 वर्षीय जीविका दीदी मीना देवी ने बताया कि उनका परिवार बहुत ही गरीब था। पति मजदूरी करके किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते थे। साल 2006 में तमिलनाडु से कुछ सीआरपी दीदी अमारी गांव घुमने के लिए आयी थी। उन्होंने मीना देवी को जीविका समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। जीविका योजना की तरफ से मीना को 5,000 रुपये व्यापार करने के लिए ऋण के तौर पर प्राप्त हुआ।

इस राशि से उन्होंने साईकिल से घर का सामान बेचने का व्यवसाय शुरू किया

इस राशि से उन्होंने साईकिल से घर का सामान बेचने का व्यवसाय शुरू किया। धीरे-धीरे कारोबार बढ़ता गया और पूंजी में वृ‌द्धि हुई। कुछ समय बाद उन्होंने अपनी खुद की दुकान खोल ली और समूह से लिया गया ऋण भी समय पर चुका दिया। बढ़ती आमदनी व बिहार सरकार की शिक्षा प्रणाली ने उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा सुनिश्चित करवाया। मीना ने कहा कि राज्य में विकास के लिए काम कर रही एनडीए सरकार ने लाखों मीना का घर संवारा है। आज बिहार के गांव-गांव में महिला आत्मनिर्भर व सम्मानजनक जीवन बीता रही है।

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