Dhanbad: जेल में बंद कैदियों को उनके अपराधों के आधार पर रखने का प्रावधान है, लेकिन क्या धनबाद जेल में बंदियों को जातिगत आधार पर भी अलग-अलग रखा जाता है? या उन्हें वर्गीकृत किया जाता है? इस बिंदु पर जांच करने धनबाद के न्यायिक पदाधिकारी, जिला प्रशासन की हाई लेबल टीम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार तिवारी के नेतृत्व में धनबाद जेल पहुंची।
Dhanbad: जांच करने जेल पहुंची टीम
इस बाबत न्यायाधीश सह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार राकेश रोशन ने जानकारी देते हुए बताया कि सामाजिक संस्था सुकन्या बनाम भारत सरकार के मामले में (रिट पिटीशन संख्या 1404/23) में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष यह बात रखी गई है कि इस बात की जांच हो कि क्या जेलों में बंदियों को जातिगत वर्गीकरण के आधार पर रखा जाता है। उनका कहना था कि अगर जातिगत भेदभाव हो रहा है, तो यह संविधान और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। यह मुद्दा जेलों के पारदर्शिता और सुधार की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि सरकार इस पर निष्पक्ष जांच कराए और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी बंदी के साथ जातिगत भेदभाव न हो।
Dhanbad: जांच के दौरान ये रहे मौजूद
इस पर सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भारत के सभी जेलों में इस बाबत जांच का निर्देश दिया था। इसके अनुपालन में आज धनबाद जेल में जांच की गई। टीम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अवर न्यायाधीश राकेश रोशन, अपर समाहर्ता सह मंडल कारा अधीक्षक विनोद कुमार, एसडीएम राजेश कुमार, प्रभारी चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. रोहित गौतम समेत अन्य लोग शामिल थे।
राजकुमार जायसवाल की रिपोर्ट
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