Patna– विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा छोड़ने के पीछे के कारणों की व्यापक चर्चा की.
भाजपा सदस्यों के द्वारा टोका-टोकी के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि
हमारी नाराजगी की वजह विधान सभा में मौजूद भाजपा विधायकों से नहीं है.
आपलोगों के द्वारा विश्वास मत पर चर्चा के दौरान जो कुछ ही कहा गया, जो आरोप लगाये गये,
उसको मैं अपने दिल पर नहीं लेता.
लेकिन यह बात आप समझिये की मेरी नाराजगी कभी भी आप लोगों से नहीं रही.
विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नीतीश कुमार ने किया अपनी पीड़ा का इजहार
लेकिन जिस प्रकार दिल्ली चीजों को हैंडल किया गया, वह नागवार गुजरा.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि मैं तो मुख्यमंत्री बनने को इच्छुक भी नहीं था,
लेकिन मुझ पर जोर डाला गया, लेकिन उसके साथ ही सभी पुराने साथियों को वापस ले लिया गया. उसके बाद भी मैं अपने काम में लगा रहा. विधान सभा अध्यक्ष के लिए भी पहले नन्द किशोर यादव के नाम रखा गया, लेकिन अचानक से विजय कुमार सिन्हा का नाम सामने आया.
सुशील कुमार मोदी और प्रेम कुमार को हटाना भी नागवार गुजरा
सुशील कुमार मोदी, प्रेम कुमार सभी को दरकिनार किया गया, बिल्कुल एक नयी टीम दे दी गयी, पुराने साथियों में से सिर्फ दो मेरे साथ रहें.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ किया कि चुनाव के समय से ही जदयू के खिलाफ साजिश रचने की शुरुआत हो गयी थी. इस साजिश का हम शिकार हो गयें.
नीतीश कुमार ने एक-एक कर उन सभी आंकड़ों को सामने रखा.
जब जदयू बिहार में भाजपा से बड़ी पार्टी थी.
लेकिन एक साजिश के तहत हमारे खिलाफ चुनाव लड़वाया गया.
नीतीश कुमार पटना विश्वविद्यालय का मामला भी उठाया और
कहा कि हमारी मांग को बावजूद भी इसे केन्द्रीय विश्व विद्यालय का दर्जा नहीं दिया गया.
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