Fielding Of RSS : चुनावी वर्ष में झारखंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारकों के जुटान के हैं गूढ़ सियासी मायने

रांची में 12 जुलाई से होने वाली संघ के प्रांत प्रचारकों का जुटान काफी अहम माना जा रहा है।

रांची  : Fielding Of RSSचुनावी वर्ष में झारखंड में राष्ट्रीय स्वयं संघ के प्रचारकों के जुटान के है गूढ़ सियासी मायने। भाजपा की सांगठनिक रीढ़ कहे जाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की हर पहल के पीछे काफी दूरगामी सोच होती है, यह देश के सियासी रणनीतिकार बखूबी जानते हैं। दिल्ली की सत्ता का रास्ता जिस यूपी से होकर गुजरता है, उसी यूपी में गत लोकसभा चुनाव में संघ की जरा सी ढिलाई का नतीजा भी भाजपा ने भुगता तो तत्काल वहां संघ के आला पदाधिकारियों ने परदे की ओट में जमीनी स्तर पर अपनी बैठकों से मोर्चा संभालना शुरू किया। इसी क्रम में अब संघ की निगाह झारखंड पर है जहां चुनावी वर्ष शुरू हो चुका है और सियासी दल चुनावी मोड में आते दिखने लगे हैं। झारखंड वही राज्य है जहां गत लोकसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में नतीजे अच्छे रहे थे। उसे यहां होने वाले विधानसभा चुनाव में दोहराने और उसकी अभी से फील्डिंग के क्रम में हो राजधानी रांची में 12 जुलाई से होने वाली संघ के प्रांत प्रचारकों का जुटान काफी अहम माना जा रहा है। इस बैठक के सियासी लिहाज से मायने खासे गूढ़ हैं।

संघ प्रमुख मोहन भागवत भी रांची के तीन दिवसीय बैठक में रहेंगे

झारखंड की राजधानी रांची में तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत खुद पहुंच रहे हैं और पूरा समय भी देंगे। गत लोकसभा चुनाव के बाद यूपी में भाजपा को मिले ठिठकाने वाले नतीजे के तुरंत बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने गोरखपुर समेत यूपी के कई प्रमुख शहरों में जाकर संघ के प्रचारकों को वैचारिक घूंटी पिलाई ताकि बूथ स्तर और पन्ना प्रमुख स्तर तक की चुनावी तैयारी करने वाली भाजपा में निचले स्तर पर छाए उदासी के बादल छंट सकें और सभी नई ऊर्जा से आगे की चुनावी तैयारियों में जुटें। झारखंड में चुनावी लिहाज से परिदृश्य तनिक बदला हुआ है और यहां चुनावी तैयारी लायक वोटरों से सीधे कनेक्ट करने वाले मुद्दे भी भाजपा की ओर से उठाए जाने शुरू हो गए हैं। उसी को धार देते हुए झारखंड की मूलवासियों और आदिवासियों से भाजपाइयों को जुड़ने और उनका विश्वास जीतने का मंत्र मोहन भागवत की ओर से रांची प्रवास के दौरान अपने प्रचारकों को झारखंड के जिम्मेदार संघ पदाधिकारियों के साथ ही भाजपा नेताओं को भी दिए जाने की पूरी उम्मीद है।

संताल और कोल्हान में बदलती डेमोग्राफी पर है संघ और भाजपा का फोकस

झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में राज्य के सत्ता पक्ष के साथ ही प्रतिपक्षी भाजपा खेमा भी है। इस लिहाज से रांची में हो रहे संघ के अखिल भारतीय प्रांत प्रचारकों की तीन दिवसीय बैठक पर सभी की नजरें हैं। इस बैठक में पूरे देश भर से संघ के संगठन की दृष्टि से बनाये गए 46 प्रांतों के प्रांत प्रचारक, सह प्रांत प्रचारक, क्षेत्र प्रचारक और अखिल भारतीय कार्यकारिणी के लोग भी पहुंच चुके हैं। बैठक में देश के विभन्न हिस्सों के साथ पश्चिम बंगाल से सटे झारखंड के संताल इलाके के साथ कोल्हान में बीते कुछ सालों मे तेजी से बदली डेमोग्राफी संघ के चिंतन के केंद्र में है। इसी मुद्दे को लेकर राज्य में भाजपा नेता लगातार सत्ता पक्ष के दलों के खिलाफ हमलावर भी है।

संघ भी झारखंड में घटी आदिवासी-मूलवासी आबादी पर चिंतित

संघ की सोच है कि संघ और भाजपा के लोग मूलवासियों और आदिवासियों के बीच उनकी लगातार घटती आबादी के मुद्दे पर जमीनी स्तर पर सीधे जुड़ें। इसका असर भी भाजपा के गतिविधियों में दिख रहा है। हाल के दिनों में भाजपा नेता लगातार इसे लेकर मुखर भी है। नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी से लेकर भवनाथपुर विधायक भानुप्रताप शाही भी लगातार इस मुद्दे पर सत्ताधारी जेएमएम और उसके सहयोगी दलों को आड़े हाथ ले रहे हैं। हाल में झारखंड में तीसरी बार मुख्यमंत्री की शपथ लेने वाले हेमंत सोरेन के विश्वास मत प्रस्ताव पर विधानसभा में हुई चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। बाउरी ने विधानसभा में कहा कि संताल और कोल्हान में आदिवासियों की संख्या हाल के वर्षों में तेजी से घटी है और मुसलमानों के साथ ही बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने इस पर चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि कुछ स्थान पर तो गिनती के आदिवासी व मूलवासी परिवार रह गये जो कि पहले मूलवासी या आदिवासी बहुल इलाके होते थे। संघ भी लगातार इसी मुद्दे को उठाने में आगे रहा है।

रांची में संघ के कार्यक्रम में शिरकत करेंगे संघ प्रमुख मोहन भागवत
रांची में संघ के कार्यक्रम में शिरकत करेंगे संघ प्रमुख मोहन भागवत

संघ की रांची की बैठक में सामाजिक –सियासी परिदृश्य पर होगा मंथन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 12 से 14 जुलाई को रांची में हो रहे अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक में लोकसभा चुनावों के बाद देश के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए मंथन होना है। साथ ही इस बैठक के शताब्दी वर्ष में संगठन के विस्तार और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के अहम मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। शताब्दी वर्ष में संघ देश के प्रमुख लोगों से मिलकर राष्ट्रनिर्माण में उनकी भूमिका का बेहतर उपयोग करने के तरीकों पर भी विचार करेगा। वर्ष 2025-26  आरएसएस का शताब्दी वर्ष है और इसमें सामाजिक परिवर्तन के पांच उपक्रम को शाखा स्तर और समाज तक पहुंचाने की योजना क्रियान्वित करने की तैयारी है। शताब्दी वर्ष के कार्य विस्तार की योजना को पूर्ण करने के लिए देश भर में 3000 कार्यकर्ता दो वर्ष का समय शताब्दी विस्तारक के रूप में दे रहे हैं। रांची में तीन दिवस की बैठक में समाज की सज्जन शक्ति को अपने साथ जोड़कर समाज परिवर्तन के लिए काम करने के तरीकों पर भी मंथन होगा। साथ ही सामाजिक जीवन के कई और विषयों पर भी चर्चा होगी।

रांची में संघ अपने प्रचारकों को हर मंडल में शाखा शुरू करने का देगा मंत्र

रांची में शुक्रवार से रविवार तक चलने वाले प्रचारकों की बैठक में संघ की ओर झारखंड के लिए चुनावी मंत्र दिए जाने के साथ ही एक और खास विषय पर गंभीर संदेश दिया जाना तय है। वह है कि आगामी शताब्दी वर्ष में देशभर के अंदर सभी मंडल स्तर तक कम से कम एक शाखा हो। वर्तमान में देशभर में 73 हजार शाखाएं संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही नगरों में बस्ती तक संघ के सेवा कार्य, विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर पहुंचने के प्रयास पर फोकस करने को खास ताकीद दिया जाना तय है। रांची की बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत के देश भर में प्रवास के विषय पर भी चर्चा होगी। बैठक से पहले मीडिया से मुखातिब हुए आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक की बैठक में पूरे देश भर से संघ के संगठन की दृष्टि से बनाये गए 46 प्रांतों के प्रांत प्रचारक, सह प्रांत प्रचारक, क्षेत्र प्रचारक और अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य उपस्थित रहेंगे एवं वे सभी संघ के विभिन्न कार्य योजनाओं पर चर्चा और समीक्षा करेंगे। आंबेकर ने कहा कि प्रतिवर्ष संघ की तीन महत्वपूर्ण बैठकें होती हैं। इस बैठक में हाल ही में सम्पन्न हुए प्रशिक्षण वर्ग एवं विभिन्न विषयों और उनके क्रियान्वयन सहित संघ के सभी कार्य विभाग के कार्यों पर चर्चा होगी।

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