रांची के नामकुम में पहली बार बाघ की आहट, गांवों में दहशत का माहौल

रांची: राजधानी रांची के नामकुम प्रखंड के गांवों में बाघ की मौजूदगी की आशंका ने ग्रामीणों में जबरदस्त दहशत पैदा कर दी है। बंधुवा और हुवांगहातु पंचायत के कई गांवों में लोग भय के साये में जी रहे हैं। महिलाओं ने जंगल जाना बंद कर दिया है, बच्चे स्कूल नहीं जा रहे और किसान खेतों की ओर रुख नहीं कर रहे हैं। जैसे ही शाम ढलती है, पूरा गांव मानो किले में तब्दील हो जाता है — लोग दरवाजे बंद कर घरों में कैद हो जा रहे हैं।

ग्रामीणों का दावा है कि चार दिन पहले कुछ महिलाओं ने जंगल में बाघ देखा था। इसके बाद सोमा उरांव और रोड़े मुंडा के दो बैल मृत पाए गए। दोनों के शवों पर नुकीले दांतों के गहरे निशान थे, जो किसी हिंसक शिकारी जानवर की मौजूदगी की ओर इशारा करते हैं।

स्थानीय लोगों में इतनी दहशत है कि अब कोई अकेले बाहर निकलने की हिम्मत नहीं कर रहा। मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थितियों में भी लोग हथियारों (टांगी, फरसा, तलवार आदि) के साथ सामूहिक रूप से ही बाहर निकल रहे हैं।

शहर के इतने करीब बाघ की मौजूदगी की आशंका पर प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है। वन विभाग ने अब तक बाघ की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इसकी संभावना से इंकार भी नहीं किया है। डीएफओ श्रीकांत वर्मा के अनुसार, तीन महीने पहले दलमा जंगल में बाघ देखा गया था, जो पिछले दस दिनों से ट्रेसलेस है। दलमा का जंगल बुंडू-तमाड़ से सटा हुआ है, जिससे नामकुम तक बाघ के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

वन विभाग की रेस्क्यू टीम को सक्रिय कर संभावित क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी गई है। फिलहाल पूरे इलाके में सावधानी और सतर्कता बरतने की अपील की गई है।

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