Hazaribagh– बड़कागांव एनटीपीसी जमीन अधिग्रहण के दौरान विरोध प्रदर्शन मामले में रांची सिविल कोर्ट ने पूर्व मंत्री योगेन्द्र साव और उनकी पत्नी और पूर्व विधायक निर्मला देवी को कोर्ट ने दोषी करार दिया है.
जबकि योगेन्द्र साव के बेटे अंकित को साक्ष्य के अभाव में बरी करार दिया गया है. सजा के बिंदुओं पर सुनवाई के लिए 24 मार्च की तिथि निर्धारित की गयी है.
बता दें कि पूर्व मंत्री योगेंद्र साव अभी होटवार जेल में बंद है, जिन्हें सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश किया गया था.
कफन सत्याग्रह के दौरान दर्ज किया गया था मामला
यह पूरा मामला वर्ष 2016 का है, तब चिरुडीह खनन क्षेत्र में एनटीपीसी के विरोध में पूर्व विधायक निर्मला देवी के नेतृत्व में कफन सत्याग्रह चल रहा था. इस सत्याग्रह में स्थानीय लोगों की भीड़ जुटी थी. इस बीच एक अक्टूबर 2016 को पुलिस निर्मला देवी को गिरफ्तार करने के लिए पहुंची. निर्मला देवी को हिरासत में लेते ही हंगामा खड़ा हो गया. लोग हिसां पर उतारु हो गए. इसी झड़प में चार लोगों की मौत हो गई.
तत्कालीन एसपी और अंचलाधिकारी भी हुए थें घायल
इस हिंसा में तत्कालीन एसपी कुलदीप कुमार और अंचलाधिकारी शैलेश कुमार सिंह भी गंभीर घायल हुए थें. कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आयी थी.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सभी मामले को हजारीबाग से रांची सिविल कोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार केस की डे टू डे सुनवाई चल रही है.
अभियोजन पक्ष की ओर से 20 जबकि आरोपितों ने अपने बचाव में 7 गवाह पेश किए थें. इसी मामले में योगेंद्र साव 2017 से जेल में बंद है.
Hazaribagh-अब सीआईडी करेगी पूर्व मंत्री योगेन्द्र साव के विरुद्ध सारे मुकदमों की जांच




