डिजीटल डेस्क : Cyber Fraud का माध्यम बने 17 हजार व्हाट्सऐप एकाउंट भारत सरकार ने किए बंद। Cyber Fraud, अन्य Cyber अपराध और डिजीटल अरेस्टिंग (गिरफ्तारी) सरीखी घटनाओं को रोकने के लिए भारत सरकार ने 17 हजार उन व्हाट्सऐप एकाउंट को बंद कर दिया है जो ऐसे अपराधों माध्यम बन रहे थे।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक विशेष टीम ने ऐसे अपराध पर नकेल कसने के लिए उनकी पड़ताल के दौरान पाया कि इन्हीं व्हाट्सऐप एकाउंट से भारत में तेजी से लोगों को Cyber अपराधियों द्वारा अपना शिकार बनाया जा रहा है।
हाल के कुछ महीनों में डिजीटल गिरफ्तारी के मामले तेजी से बढ़े जिनसे आम लोगों में अनकहा आतंक की हालत बनता देख खुद पीएम नरेंद्र मोदी को इस संबंध में बयान देना पड़ा था।
पीएम मोदी ने भारतवासियों को डिजीटल गिरफ्तारी से डरने और उसके सरकारी तंत्र की मदद से वैसा अपराध करने वालों को सबक सिखाने की बात कही थी।
डिजीटल अरेस्टिंग का डर दिखाकर रोजाना ऐंठे जा रहे 6 करोड़ रुपये
इस पूरे मामले की पड़ताल में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पाया कि इसी वर्ष (2024) में पहले 10 माह में (यानी जनवरी से अक्टूबर 2024 के बीच) Cyber अपराधियों ने भारतीयों से 2140 करोड़ रुपयों की Cyber ठगी की है या ऐंठ लिए है। बीते अक्टूबर माह तक 92 हजार 334 Cyber अपराध के मामले भी इसी क्रम में दर्ज हुए हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के Cyber अपराध और अपराधियों के ताजा पड़ताल में मिला है कि रोजाना डिजीटल अरेस्टिंग का खौफ दिखाकर भारतीयों से रोजाना 6 करोड़ रुपयों की Cyber अपराधी ठगी कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए ही भारत सरकार ने इन Cyber अपराधों का टूल बने व्हाट्सऐप एकाउंट को बंद करने का कदम उठाया है।

डिजीटल अरेस्टिंग करने वालों के विदेशी ठिकाने भी आए सुरक्षा अधिकारियों के रडार पर…
Cyber अपराध के नवीनतम तरीकों की वृहद पड़ताल में जुटे केंद्रीय गृह मंत्रालय की इलेक्ट्रानिक्स संबधी विशेषज्ञों की खास सुरक्षाधिकारियों की टीम ने सनसनीखेज तथ्य जुटाए हैं। इनका अभी खुलासा नहीं किया गया है और Cyber अपराधियों की कमर तोड़ने पर व्यापक स्तर पर काम जारी है।
सबसे पहले Cyber अपराधियों के हथियार उनके टूल को चिन्हित कर उन पर वार करना शुरू किया गया है। सोशल मीडिया वाले प्रचलित टूल में से व्हाट्सऐप के मार्फत सबसे ज्यादा भारत में लोग ठगी का शिकार बनाए गए हैं। इनमें भी अधिकतर डिजीटल अरेस्टिंग के नाम पर ऐंठे गए हैं और घटना होने के बाद ठगी का शिकार हुए लोग अपनी मूर्खता पर पछता रहे हैं।
पड़ताल में गृह मंत्रालय की टीम ने पाया है कि भारतीय को डिजीटल अरेस्टिंग के फंदे में कसने का काम भारत की धरती से बल्कि चुनिंदा विदेशी धरती से किया जा रहा है। अब उनकी भी कुंडली खंगाली जानी शुरू हुई है।

कंबोडिया, लाओस, म्यांमार और थाईलैंड से Cyber ठग भारत में अपने शिकारों को कर रहे डिजीटल अरेस्ट…
केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम ने अपने इसी जारी गोपनीय पड़ताल में पाया है कि विदेशी धरती पर बैठे Cyber ठग व्हाट्सऐप सरीखे सोशल मीडिया माध्यमों पर सक्रिय भारतीयों को अपने झांसें में फांसते हैं। इस क्रम में सबसे सहज और सुलभ तरीका है- बेरोजगारों को विदेशों में मोटी सैलरी वाली नौकरी या रोजगार का लालच।
पड़ताल में मिला है कि डिजीटल अरेस्टिंग के अभी तक सामने आए मामलों में ऐसे ही वजहों में फंसे भारतीयों के ठगे जाने का मामला मोटे रूप में सामने आया है।
ऐसी ठगी का शिकार करने वाले Cyber ठगों ने अपने काम को कंबोडिया, लाओस, थाईलैंड और म्यांमार से अंजाम दिया है।
पता चला है कि शुरू में गृह मंत्रालय की टीम हरियाणा के नूंह और झारखंड के जामताड़ा के Cyber अपराधियों पर शक था जहां पहले बड़ी संख्या में अतीत में एकमुश्त Cyber अपराधियों की धरपकड़ हो चुकी है।
उन्हें भी भारतीय जांच एजेंसियों ने अपने रडार पर रखा हुआ है लेकिन पड़ताल में विदेशों से भारतीयों को ऐंठने का मामला बड़े स्तर पर और नियमित जारी रहने का भी मिला है। इसी क्रम में हजारों की संख्या में संदिग्ध Cyber ठगों के व्हाट्सऐप एकाउंट मिले और उनके खिलाफ पुख्ता जानकारी मिलते ही भारत सरकार ने उन व्हाट्सऐप एकाउंटों को बंद करने का निर्देश दिया है।


















