पटना: शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन बिहार विधानसभा में आरक्षण का मुद्दा लेकर विपक्ष सरकार पर हावी रहा। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सदन की कार्रवाही शुरू होने से पहले भी विधानसभा के मुख्य द्वार पर अपने विधायकों के साथ आरक्षण का दायरा 65% करने की मांग के साथ हाथ में तख्ती लेकर प्रदर्शन किया। इसके साथ ही सदन में भी वे आरक्षण की सीमा बढ़ाये जाने की मांग को लेकर सरकार पर हमलावर रहे। तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर कोर्ट ने आरक्षण के बढ़ाये गए दायरे को निरस्त कर दिया है तो सरकार एक कमिटी बनाये।
तेजस्वी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि संविधान दिवस के अवसर पर हम लोगों को आश्वस्त करते हैं कि किसी भी कीमत पर हम संविधान में छेड़छाड़ नहीं होने देंगे। हम लोग जब सरकार में थे तब हमलोगों ने आरक्षण के दायरा को बढ़ाया। उस वक्त हमने केंद्र सरकार से मांग की थी कि संविधान की नौंवी अनुसूची में डाल दिया जाये। आरक्षण की सीमा बढ़ाये जाने के करीब सात महीने बाद सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई लेकिन केंद्र सरकार ने इसे नकार दिया।
उन्होंने कहा कि कोर्ट ने कहा था कि बिना अध्ययन के आरक्षण की सीमा नहीं बढ़ाई जा सकती है तो ईडब्ल्यूएस भी बिना अध्ययन के ही लाया गया था। हम किसी का विरोध नहीं करते हैं बस हम चाहते हैं कि बहुजन समाज को उसका हिस्सा मिले और राज्य सरकार एक बार फिर से आरक्षण बिल लाये। कमिटी पूरे मामले की समीक्षा करे और समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर दुबारा आरक्षण बिल सदन में लाये। सरकार अगले बिल में आरक्षण का दायरा 75 से बढ़ा कर 85 प्रतिशत का कर दे हमलोग इसका समर्थन करेंगे और नवमी सूची में शामिल करने के लिए अनुशंसा केंद्र सरकार को भी भेजे।
तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश पर हमला करते हुए कहा कि जब वे हमारे साथ रहते हैं तो ठीक रहते हैं और जब वे भाजपा के साथ जाते हैं तो उनके ऊपर संगत का असर पड़ गया है। नीतीश कुमार जब हमारे साथ थे तो तो उन्होंने प्रस्ताव लाया था और अब नीतीश कुमार पूरे मामले में कुछ भी नहीं बोल रहे हैं।
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पटना से विवेक रंजन की रिपोर्ट
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