Hazaribagh 117 Acre Land Dispute: रांची स्थित झारखंड हाई कोर्ट ने हजारीबाग ज़िले के बरकठा सर्कल के मौजा-बेरो कला में 117.68 एकड़ विवादित जमीन से जुड़े मामले में बड़ी अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि फिलहाल विवादित ज़मीन पर यथास्थिति (status quo) बनाए रखी जाए और बरही SDO के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसके तहत 118 रैयतों (ज़मीन मालिकों) की जमाबंदी (ज़मीन के रिकॉर्ड की एंट्री) रद्द कर दी गई थी।
40 साल से चल रहे जमाबंदी रिकॉर्ड को लेकर विवाद
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 118 रैयतों के नाम पर लगभग 40 वर्षों से वैध जमाबंदी रिकॉर्ड मौजूद थे और वे लंबे समय से जमीन पर काबिज़ थे। आरोप है कि अगस्त 2024 में SDO ने इन सभी जमाबंदी एंट्रीज़ को रद्द करने और एक निजी पार्टी के नाम पर नई जमाबंदी दर्ज करने का आदेश जारी किया, जिसके बाद प्रभावित रैयतों ने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।
1984 के आदेश का हवाला
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि 1984 में तत्कालीन डिविज़नल कमिश्नर ने इसी जमीन विवाद को लेकर निजी पार्टी के दावे को खारिज करते हुए रैयतों के अधिकारों को मान्यता दी थी। नतीजतन, दशकों पुराने आदेश को नज़रअंदाज़ करते हुए SDO द्वारा लिया गया निर्णय अधिकार क्षेत्र और उचित प्रक्रिया (due process) दोनों पर सवाल खड़े करता है।
राज्य सरकार से छह हफ़्ते में जवाब मांगा गया
जस्टिस आनंद सेन की अध्यक्षता वाली सिंगल बेंच ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर छह हफ़्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। विवादित ज़मीन की मौजूदा स्थिति बनाए रखने का आदेश अगली सुनवाई तक लागू रहेगा।
ज़मीन विवादों पर हाई कोर्ट का सख्त रुख
हाल के दिनों में, झारखंड हाई कोर्ट जमीन से जुड़े मामलों को लेकर सक्रिय रुख अपना रहा है। इसी क्रम में, कोर्ट ने कोडरमा ज़िले में एक अन्य रैयती ज़मीन विवाद में भी पुराने रिकॉर्ड जमा करने का निर्देश दिया है। इससे पता चलता है कि कोर्ट ज़मीन के रिकॉर्ड और प्रशासनिक फैसलों की वैधता की बारीकी से जांच कर रहा है।
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