Hazaribagh Forest Land Scam Case:हजारीबाग वन भूमि घोटाला केस में एसीबी ने विनय चौबे के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। परिवार और विनय सिंह की कंपनी के बीच मनी ट्रेल के सबूत सामने आए।
Hazaribagh Forest Land Scam Case:रांची: रांची से जुड़े बहुचर्चित हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने पूर्व डीसी विनय चौबे के खिलाफ जांच पूरी कर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। आरोप है कि हजारीबाग में उपायुक्त पद पर रहते हुए वन भूमि से संबंधित अनियमितताओं को अंजाम दिया गया।
एसीबी इससे पहले इस मामले में विनय सिंह और तत्कालीन अंचलाधिकारी शैलेश कुमार की भूमिका की जांच कर चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। अब विनय चौबे की भूमिका से जुड़े साक्ष्य जुटाकर अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।
Hazaribagh Forest Land Scam Case:परिवार और कंपनी के बीच Money Trail से साठगांठ के संकेत
जांच के दौरान एसीबी ने विनय चौबे और विनय सिंह के बीच कथित साठगांठ को स्थापित करने के लिए वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को खंगाला। जांच एजेंसी के अनुसार विनय चौबे के परिवार और विनय सिंह की कंपनी के बीच धन के प्रवाह के प्रमाण मिले हैं।
यहां मनी ट्रेल का अर्थ भ्रष्टाचार या मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में धन के आने और जाने के रास्तों का विश्लेषण करना होता है। एसीबी का दावा है कि इन लेनदेन से दोनों पक्षों के बीच लाभ संबंधों के संकेत मिलते हैं।
Key Highlights
हजारीबाग वन भूमि घोटाला में पूर्व डीसी विनय चौबे के खिलाफ चार्जशीट
विनय चौबे परिवार और विनय सिंह की कंपनी के बीच मनी ट्रेल के संकेत
28 डिसमिल जमीन की जमाबंदी के लिए दबाव का आरोप
म्यूटेशन के बाद जमीन पर बना शोरूम
मूल दस्तावेज गायब, जांच में नया मोड़
Hazaribagh Forest Land Scam Case:तत्कालीन सीओ के बयान से खुला मामला
मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी अलका कुमार का बयान जांच का महत्वपूर्ण आधार बना। बयान में उन्होंने कहा कि 28 डिसमिल जमीन की जमाबंदी के लिए उन पर दबाव बनाया गया था। उस समय विनय चौबे हजारीबाग के उपायुक्त थे।
अलका कुमार के अनुसार उन्हें डीसी चेंबर में बुलाया गया था, जहां विनय सिंह भी मौजूद थे। जब उन्होंने जमीन का म्यूटेशन करने से इंकार किया तो उन पर दबाव डाला गया। बाद में संबंधित जमीन का म्यूटेशन किया गया।
Hazaribagh Forest Land Scam Case:म्यूटेशन के बाद बना शोरूम, मूल दस्तावेज गायब
जांच में यह भी सामने आया कि जिस जमीन का म्यूटेशन कराया गया, उसी पर बाद में विनय सिंह द्वारा एक शोरूम का निर्माण कराया गया।
एसीबी जब म्यूटेशन से जुड़े मूल दस्तावेजों की तलाश में जुटी तो पाया कि संबंधित जमीन के मूल दस्तावेज गायब हैं। दस्तावेजों का अभाव जांच को और गंभीर बनाता है।
एसीबी की चार्जशीट के बाद अब मामले में न्यायालय में सुनवाई की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। वन भूमि घोटाले से जुड़े इस प्रकरण ने प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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