हजारीबाग जिला परिषद बिल्डिंग विवाद में खास महल जमीन पर अवैध निर्माण का खुलासा, डीसी ने जांच कमेटी गठित करने का दिया आश्वासन।
हजारीबाग : हजारीबाग में जिला परिषद की बिल्डिंग को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह बिल्डिंग, जिसे मूल रूप से गरीब और ग्रामीण युवाओं को दुकान आवंटित करने के उद्देश्य से बनाया गया था, आज एक निजी अस्पताल के मालिक के कब्जे में है। इस पर गंभीर सवाल उठे हैं और अब आरटीआई एक्टिविस्ट राजेश मिश्रा और समाजसेवी मनोज गुप्ता ने जिला उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह से मुलाकात कर कई अहम खुलासे किए हैं।
खास महल की जमीन पर बनी जिला परिषद की बिल्डिंग
जानकारी के मुताबिक, जिस जमीन पर यह जिला परिषद बिल्डिंग खड़ी है, वह खास महल की जमीन है। इसे कई दशक पहले जिला परिषद को केवल दफ्तर बनाने के लिए लीज पर दिया गया था। लेकिन लीज खत्म हो जाने के बावजूद न तो जिला परिषद ने जमीन खाली की और न ही इसे मूल उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया गया। इसके विपरीत, यहां पर आलीशान बिल्डिंग खड़ी कर दी गई और फिर उस बिल्डिंग को किराए पर देकर निजी अस्पताल मालिक को सौंप दिया गया।

नोटिस के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
खास महल पदाधिकारी की ओर से इस मामले में पहले भी जिला परिषद सचिव और संबंधित अस्पताल मालिक को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में स्पष्ट सवाल उठाया गया कि आखिर बिना अनुमति के जमीन पर बिल्डिंग कैसे बना दी गई और फिर उसे किराए पर कैसे दे दिया गया। लेकिन इस नोटिस का कोई असर नहीं पड़ा और बिल्डिंग का इस्तेमाल पहले की तरह चलता रहा।
Key Highlights
जिला परिषद की बिल्डिंग खास महल की जमीन पर अवैध रूप से निर्मित
गरीब ग्रामीण युवाओं को दुकान देने की योजना ठंडे बस्ते में
नोटिस के बावजूद प्रशासन ने अब तक नहीं की कार्रवाई
अस्पताल और नर्सिंग कॉलेज पर कब्जे के आरोप
आरटीआई एक्टिविस्ट ने पूर्व डीसी विनय चौबे के केस का दिया उदाहरण
पत्रकार टीपी सिंह की मौत की जांच की मांग तेज
डीसी ने जांच कमेटी गठित करने का दिया आश्वासन
अस्पताल और नर्सिंग कॉलेज पर भी सवाल
समाजसेवी मनोज गुप्ता ने डीसी से मुलाकात के दौरान यह भी बताया कि जिला परिषद बिल्डिंग के बगल में अस्पताल मालिक द्वारा नर्सिंग कॉलेज भी संचालित किया जा रहा है। यह नर्सिंग कॉलेज भी खास महल की जमीन पर खड़ा किया गया है। यानी सिर्फ एक बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र पर कब्जे और जमीन के गलत इस्तेमाल का मामला सामने आ रहा है।
आरटीआई एक्टिविस्ट का बड़ा आरोप
आरटीआई एक्टिविस्ट राजेश मिश्रा ने कहा कि जिस प्रकार उनकी मां के द्वारा की गई शिकायत के आधार पर हजारीबाग के पूर्व डीसी विनय चौबे को खास महल की जमीन से जुड़े घोटाले में जेल जाना पड़ा था, उसी तरह अगर इस मामले की भी निष्पक्ष और गहन जांच हो तो कई अधिकारी सलाखों के पीछे जा सकते हैं।
पत्रकार टीपी सिंह की मौत की जांच की मांग
मनोज गुप्ता ने इस अवसर पर एक और गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हजारीबाग के वरिष्ठ पत्रकार टीपी सिंह की मौत कोरोना काल में आरोग्यं अस्पताल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। इस पर लगातार संदेह व्यक्त किया जाता रहा है। गुप्ता ने विधायक प्रदीप प्रसाद और जिला प्रशासन से मांग की कि अगर यह साजिशन हत्या है तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
डीसी का आश्वासन
उपयुक्त शशि प्रकाश सिंह ने आरटीआई एक्टिविस्ट और समाजसेवी की बात ध्यान से सुनी और कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी पहले नहीं थी। उन्होंने यह आश्वासन दिया कि अब एक जांच कमेटी गठित की जाएगी जो बिल्डिंग, जमीन और निजी आवंटन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट और समाजसेवी ने सबूतों के साथ पत्र सौंपकर डीसी से अपील की है कि इस पर कठोर कार्रवाई हो और पूरी सच्चाई सामने आए। यह भी देखना होगा कि जिला परिषद और खास महल प्रशासन के बीच की कानूनी लड़ाई कहां तक पहुंचती है और क्या इस बार भी बड़े अधिकारियों तक जांच की आंच पहुंचती है।
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