तुझे नगमों की जान अहले नज़र यूं ही नहीं कहते,
तेरे गीतों को दिल का हमसफ़र यूं ही नहीं कहते।
सुनी सबने मुहब्बत की ज़बान आवाज़ में तेरी,
धड़कता है दिले हिन्दुस्तान आवाज़ में तेरी।
आज वो आवाज़ थम गई. 6 फरवरी को संगीत की देवी लता मंगेशकर की आत्मा अनंत में विलीन हो गई. साल 1942 में महज़ 13 वर्ष की उम्र में अपने करियर की शुरुआत करने वाली लता मंगेशकर को पहचान मिली 1949 में आई फ़िल्म महल के गाने “आएगा आने वाले से”. इसके बाद स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने मुड़ कर नहीं देखा. इसके बाद के 6 दशकों में स्वर साम्रगी लता मंगेशकर ने अपनी सुरीली आवाज़ के ज़रिए देश दुनिया में लोगों के दिलों पर राज किया.
गाना रोमांटिक हो, सैड हो, क्लासिकल हो, सेमिक्लासिकल हो, गीत हो या ग़ज़ल, हिप हॉप हो या डिस्को, लता दीदी ने अपनी आवाज़ से उन्हें लोगों के दिलों तक पहुंचाया. मधुबाला से लेकर प्रियंका चोपड़ा तक के लिए उन्होंने गाने गाए. संगीत की वज़ह से कई शख़्स शिखर तक पहुंचा है पर भारत रत्न लता मंगेशकर की आवाज़ ने संगीत को शिखर पर स्थापित किया. नाम गुम जाएगा चेहरा ये बदल जाएगा, मेरी आवाज़ ही पहचान है ग़र याद रहे. सच लता मंगेशकर की आवाज़, देश दुनिया में सदियों सदियों तक याद की जाती रहेगी.
राकेश रंजन कटरियार

















