हेमंत ने दिया 1932 का खतियान, आदिवासी बचायें जमीन

Gumla- बिशुनपुर में तीन दिवसीय जतरा टाना भगत जयंती जतरा सह ग्राम सभा व पड़हा मिलन समारोह में

मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डॉ रामेश्वर उरांव ने

आदिवासी समुदाय को अपनी भाषा और जमीन को संजों कर रखने की अपील की है.

जतरा टाना भगत जयंती पर बोले रामेश्वर उरांव

उन्होंने कहा कि 22 वर्षों में यह पहली कोई सरकार है,

जो भाषा के आधार पर नौकरी दे रही है, झारखंडी भाषा की जानकारी रखने वाले को ही

झारखंड में सरकारी नौकरी मिलेगी.

उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में विधानसभा चुनाव के समय

मैंने कांग्रेस के घोषणापत्र में सरना धर्म कोड लागू होने का वादा किया गया था

और जिसका नतीजा यह हुआ कि आदिवासियों ने भरोसा करके गठबंधन की सरकार को अपना समर्थन दिया

और सरकार बनने के बाद ही ईमानदारी पूर्वक हेमंत सोरेन सरकार ने

झारखंड विधानसभा से सरना धर्म कोड लागू कर आदिवासियों की धार्मिक पहचान को पूरा करने का काम किया.

सरना धर्म कोड में कोई गड़बड़ी नहीं करे केन्द्र सरकार

उन्होंने कहा मुझे पूरी उम्मीद है कि

केंद्र की सरकार सरना धर्म कोड को पास करने में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं करेगी.

डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि आदिवासियों को अपनी जमीन बचा कर रखना होगा

और इसलिए झारखंड सरकार ने 1932 का खतियान उन्हें दिया है ताकि उनकी जमीन वापसी हो सके.

हेमंत सरकार अपनी ओर से सारा प्रयास कर रही है, एक एक वादे को पूरा किया जा रहा है.

लेकिन इसके साथ ही आदिवासी समुदाय भी अपनी जमीन को बचाने की कोशिश करे.

यहां यह भी बतला दें कि हेमंत सरकार ने अभी हाल ही में 1392 का खतियान को लागू करने की घोषणा की है,

इसे कैबिनेट से पास भी कर दिया गया है, माना जा रहा है कि यह हेमंत सरकार का मास्टर स्ट्रोक हो सकता है.

किसकी नजर लगी कांग्रेस को, रामेश्वर उरांव ने इशारों ही इशारों में साधा निशाना

1932 का खतियान नहीं,जमीन के आधार पर तय हो स्थानीयता- रामेश्वर उरांव

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