झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren की याचिका पर हाईकोर्ट में 19 नवंबर को सुनवाई होगी, जिसमें PMLA की धारा 44 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।
Google पर 22Scope चुनेंझारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। पीएमएलए की धारा 44 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए ED कोर्ट के ट्रायल पर रोक लगाने की मांग की गई है।
Hemant Soren Case रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren की याचिका पर बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में केंद्र सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख निर्धारित की है। हेमंत सोरेन ने अपनी याचिका में मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 44 के प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। साथ ही, रांची की ED अदालत में उनके खिलाफ चल रहे ट्रायल पर रोक लगाने की मांग की है।
Hemant Soren Case:PMLA की धारा 44 को हाईकोर्ट में चुनौती
हेमंत सोरेन की ओर से अदालत में दलील दी गई कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) जांच पूरी करने के बाद ईडी कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल कर चुका है। इसके बावजूद जांच जारी रहने की बात कही जा रही है। याचिकाकर्ता की ओर से इसी आधार पर ट्रायल की कार्यवाही आगे बढ़ाने पर रोक लगाने की मांग की गई है।
याचिका में पीएमएलए की धारा 44 की उपधारा 1 और 2 की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। यह प्रावधान मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की सुनवाई और संबंधित मुकदमों की प्रक्रिया से संबंधित हैं। हाईकोर्ट में इस मामले पर आगे की सुनवाई 19 नवंबर को होगी।
Hemant Soren Case:केंद्र सरकार ने मांगा जवाब दाखिल करने का समय
बुधवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत में जवाब दाखिल नहीं किया जा सका। केंद्र की ओर से जवाब पेश करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। अदालत ने इस मांग को स्वीकार करते हुए सुनवाई की अगली तारीख तय कर दी।
इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को मामले में प्रतिवादी बनाते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। अब अगली सुनवाई में केंद्र सरकार का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल हाईकोर्ट ने याचिका पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।
बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है मामला
यह मामला रांची के बरियातू स्थित बड़गाईं क्षेत्र की 8.86 एकड़ जमीन पर कथित अवैध कब्जे और फर्जीवाड़े से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में हेमंत सोरेन को आरोपी बनाया है। मामले की सुनवाई रांची की ईडी अदालत में चल रही है।
ईडी कोर्ट ने 30 सितंबर को हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय किए थे। साथ ही, जांच एजेंसी को 30 नवंबर से गवाहों के बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया था। हेमंत सोरेन की ओर से आरोप तय किए जाने के आदेश को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
19 नवंबर की सुनवाई पर रहेगी नजर
हेमंत सोरेन की याचिका में दो प्रमुख मुद्दे उठाए गए हैं। पहला, पीएमएलए की धारा 44 की संवैधानिक वैधता और दूसरा, ईडी कोर्ट में चल रहे ट्रायल पर रोक लगाने की मांग। हाईकोर्ट में अगली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के जवाब और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर मामले की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।
Hemant Soren की याचिका में मुख्य मांग क्या है?
Hemant Soren ने PMLA की धारा 44 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए रांची की ED अदालत में चल रहे ट्रायल पर रोक लगाने की मांग की है। उनका तर्क है कि ED जांच पूरी कर चुका है और फिर भी जांच जारी है।
यह मामला किस जमीन से संबंधित है?
यह मामला रांची के बरियातू स्थित बड़गाईं क्षेत्र की 8.86 एकड़ जमीन पर कथित अवैध कब्जे और फर्जीवाड़े से संबंधित है।
अगली सुनवाई कब निर्धारित की गई है?
झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख निर्धारित की है।
केंद्र सरकार ने अदालत में क्या किया है?
केंद्र सरकार को मामले में प्रतिवादी बनाया गया है और उसे मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है, जिसके लिए सरकार ने अतिरिक्त समय मांगा है।
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