Ranchi– राखी बंधन का इतिहास – रक्षा बंधन दो शब्दों के मिलने से बना हुआ है, “रक्षा” और “बंधन“.
इसका मतलब होता है की “एक ऐसा बंधन जो की रक्षा प्रदान करता हो”.
“बंधन” का मतलब होता है एक गांठ, एक डोर जो की रक्षा प्रदान करे.
रक्षा बंधन के दिन बहन अपने भाई के कलाई में राखी बांधती है. वहीं वो भगवान से ये मांगती है की उसका भाई हमेशा खुश रहे और स्वस्थ रहे.
वहीं भाई भी अपने बहन को बदले में तौफा देता है और यह प्रतिज्ञा करता है,
किसी भी विपदा में वह अपनी बहन की रक्षा के लिए खड़ा रहेगा.
राखी बंधन का इतिहास
पाताल में रहने वाले राजा बलि के हाथ में लक्ष्मी जी ने राखी बांध कर उनको अपना भाई बनाया और नारायण जी को मुक्त किया.
वह दिन सावन पूर्णिमा का था. 12 साल इंद्र और दानवों के बीच युद्ध चला. हमारे 12 वर्ष
उनके 12 दिन होते हैं. इंद्र थक गए थे और दैत्य शक्तिशाली हो रहे थे.
इंद्र उस युद्ध से खुद के प्राण बचाकर भाग जाने की तैयारी में थे.
इंद्र की इस व्यथा को सुनकर इंद्राणी गुरु बृहस्पति के शरण में गई.
गुरु बृहस्पति ने ध्यान लगाकर इंद्राणी को बताया कि यदि आप पतिव्रत बल का प्रयोग करके संकल्प लें
कि मेरे पति सुरक्षित रहें और इंद्र के दाहिने कलाई पर एक धागा बांध दें, तो इंद्र युद्ध जीत जाएंगे.
इंद्राणी ने ऐसा ही किया. इन्द्र विजयी हुए और इंद्राणी का संकल्प साकार हुआ.
रानी कर्णावती ने सम्राट हुमायूं बांधी थी राखी
रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ को राखी बांधी थी. ये उस समय की बात है जब राजपूतों को अपना राज्य को बचाने के लिए मुसलमान राजाओं से युद्ध करना पड़ रहा था. उस समय चितौर पर गुजरात के सुल्तान बहादुर साह ने हमला कर दिया. ऐसे में रानी अपने राज्य को बचा सकने में असमर्थ होने लगी. इस परिस्थिति में रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेज अपनी सुरक्षा की गुहार लगायी.
हुमायूँ ने भी अपनी बहन की रक्षा के हेतु अपनी एक सेना की टुकड़ी चित्तौर भेज दिया. जिससे बाद में बहादुर साह के सेना को पीछे हटना पड़ा था.
इस विधि से बांधें राखी
वैदिक मान्यताओं के अनुसार चावल, सोना और सफेद राई पोटली में एक साथ बांधने पर राखी बनती है, वह रेशमी धागे से बांधी जाती है.
राखी बांधते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए……
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल

















