कबाड़ी दुकान में भीषण आग, NH-27 किनारे मची अफरा-तफरी, 3 जिलों से पहुंची फायर ब्रिगेड की टीमें

दरभंगा : दरभंगा के एनएच-27 हाइवे के किनारे रानीपुर पासवान टोला के पास स्थित एक कबाड़ी दुकान में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कबाड़ी दुकान में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील सामान रखे थे, जिसके कारण आग तेजी से भड़क उठी और आसपास के खेतों तक फैल गई। ऊंची उठती आग की लपटें दूर-दूर तक दिखाई दे रही थीं, जिससे लोग दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए।

सूचना पर अग्निशमन की कुल 6 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं

सूचना मिलते ही अग्निशमन की कुल छह गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने के प्रयास शुरू किए। हालात की गंभीरता को देखते हुए दरभंगा, मधुबनी और मुजफ्फरपुर से अतिरिक्त फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मंगाई गईं। अधिकारियों और कर्मियों ने करीब तीन घंटे तक लगातार पानी का छिड़काव किया, तब जाकर आग पर आंशिक काबू पाया जा सका। देर रात तक दमकल टीमें मौके पर डटी रहीं।

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स्थानीय युवकों ने साहस का परिचय देते हुए कबाड़ी दुकान से कई सामान बाहर निकाला

इस दौरान स्थानीय युवकों ने भी साहस का परिचय देते हुए कबाड़ी दुकान से कई सामान बाहर निकाल कर आग को आगे फैलने से रोकने में मदद की। ग्रामीणों ने कहा कि इतनी तेज लपटें हमने पहले कभी नहीं देखीं। अगर समय रहते फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोग प्रयास नहीं करते, तो आसपास के तीन गांव तक आग पहुंच सकती थी और सैकड़ों घर-संपत्ति खाक हो जाती। हालांकि आग के कारणों का अभी स्पष्ट तौर पर पता नहीं चल सका है। अग्निशमन विभाग और पुलिस मामले की जांच में जुटी है। फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन भारी आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

चौंकाने वाली बात यह है कि इस तरह की घटनाएं कोई नई नहीं हैं। जिले में कबाड़ी दुकानों और ज्वलनशील सामग्री के अवैध भंडारण से जुड़ी आग की घटनाएं बार-बार सामने आती रही हैं, लेकिन हर बार प्रशासन की भूमिका केवल आग बुझने के बाद खानापूर्ति तक सीमित रह जाती है। न तो समय रहते सुरक्षा मानकों की जांच की जाती है, न ही दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई कबाड़ी दुकानें बिना लाइसेंस और नियमों के खुलेआम संचालित हो रही हैं, जिसकी जानकारी प्रशासन को होने के बावजूद आंखें मूंद ली जाती हैं। नतीजा यह है कि प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा आम जनता को अपनी जान-माल जोखिम में डालकर भुगतना पड़ता है। सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक ऐसी घटनाओं के बाद ही सिस्टम जागेगा और कब तक सरकारी उदासीनता लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ करती रहेगी?

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वरुण ठाकुर की रिपोर्ट

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