काश! सीएम रोज-राेज आते तो बदल जाती बोकारो की सूरत

Bokaro- काश! सीएम हर रोज आते, मार्ग बदल-बदल कर आते तो शायद बदल जाती बोकारो की सूरत और सीरत.

जी हां, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एक दिन के लिए अपनी बहन की ससुराल आयें तो 24 घण्टे में ही बदल गई बरसों से जर्जर सड़क की सूरत.

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इसके बाद से यह हर गांव-मुहल्ले की आवाज बन गई. अब उनकी अपनी तमाम समस्यायों का एक मात्र समाधान मुख्यमंत्री के बार-बार आने में दिखता है. क्योंकि आम जनों को यह लगता है कि यह मृत प्राय: व्यवस्था तब ही अपनी कुम्भकर्णी निंद से जागती है जब मुख्यमंत्री का आगवन होता है. रातों रात सड़क का निर्माण हो जाता है, वर्षों से गूल बिजली अचानक से जगमगा उठती है. स्वास्थ्य केन्दों पर अचानक स्वास्थ्य कर्मी दिखने लग जाते हैं. अंचल से प्रखंड कार्यालय तक में बाबू टहलने लगते हैं.

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बरसों से एक राशन कार्ड के लिए दर-दर भटकता मंगरु का आवेदन अंचल कार्यायल का बाबू बड़े प्यार से अपने हाथों में लेकर तुरंत बनवाने का आश्वासन ठोक देता है. गांव-गांव में घूमकर वृद्ध जनों की खोज की जाने लगती है, वृद्धा कार्ड बनवाने की मुहिम तेज हो जाती है.

बता दें कि मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से बोकारो के चैनपुर पंचायत के झोपड़ो बस्ती अपने चचेरी बहन के घर बहु भोज में आये थें. मुख्यमंत्री के आगमन की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने बरसों से टूटी फूटी सड़क को रातोंरात चमका दिया. भरी ठंड में रात-रात भर आले अधिकारियों की टीम सड़क निर्माण में जुटी रही. अहले सुबह सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जाने लगा.

मालूम हो कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की चचेरी बहन की शादी 30 नवम्बर को झोपडो निवासी स्वर्गीय मोचीराम मरांडी के बेटे भोला मरांडी के साथ हुई है. जिसका आज बहु भोज है. अपनी बहन के बहु भोज में मुख्यमंत्री सम्मलित हुए. मुख्यमंत्री के आगवन को देखते हुए जिला प्रशासन ने बीपीसील के द्वारा सड़का का निर्माण करवा दिया.

रिपोर्ट- चुमन

बोकारो की स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत, जांच के जंजाल में चली गई मरीज की जान

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