झारखंड हाइकोर्ट ने कहा कि शादी से पहले लिव इन रिलेशनशिप जैसी अहम जानकारी छिपाकर ली गई सहमति धोखाधड़ी है, ऐसे विवाह को शून्य घोषित किया जा सकता है।
Jharkhand High Court : शादी से पहले तथ्य छिपाना धोखाधड़ी
रांची: झारखंड हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि शादी से पहले पति द्वारा महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए जाते हैं और पत्नी की सहमति धोखे से ली जाती है, तो ऐसा विवाह कानून की नजर में टिकाऊ नहीं माना जा सकता। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि इस स्थिति में विवाह को शून्य घोषित करना पूरी तरह विधिसम्मत है।
Jharkhand High Court : लिव इन रिलेशनशिप की जानकारी छिपाना गंभीर
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि शादी से पहले लिव इन रिलेशनशिप जैसी गंभीर जानकारी छिपाना सीधे तौर पर धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। अदालत के अनुसार, यदि यह जानकारी सामने होती तो विवाह के लिए दी गई सहमति स्वतः प्रभावित होती। ऐसे मामलों में विवाह को वैध नहीं ठहराया जा सकता।
शादी से पहले तथ्य छिपाना धोखाधड़ी की श्रेणी में
लिव इन रिलेशनशिप की जानकारी छिपाना गंभीर अपराध
धोखे से ली गई सहमति पर विवाह टिकाऊ नहीं
गढ़वा फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार
विवाह को शून्य घोषित करना पूरी तरह विधिसम्मत
Jharkhand High Court : फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार
हाइकोर्ट ने गढ़वा फैमिली कोर्ट के 16 फरवरी 2017 के फैसले को सही ठहराते हुए विवाह को शून्य घोषित करने के आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि निचली अदालत द्वारा दिए गए निष्कर्ष कानून और तथ्यों के अनुरूप हैं, इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
Jharkhand High Court : जानिए पूरा मामला
मामले के अनुसार, दो दिसंबर 2015 को गोरखपुर में हिंदू रीति रिवाज से विवाह संपन्न हुआ था। विवाह के दौरान और उससे पहले पत्नी के पिता द्वारा अलग अलग बैंक खातों में कुल 26.4 लाख रुपये की राशि ट्रांसफर की गई थी। इसमें कार खरीद और अन्य खर्च शामिल थे।
पत्नी का आरोप था कि विवाह के बाद उसे जानकारी मिली कि पति पहले से ही एक महिला के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रहा था। यह तथ्य जानबूझकर उससे छिपाया गया था। ससुराल पहुंचने के कुछ ही दिनों बाद उससे 15 लाख रुपये अतिरिक्त दहेज की मांग की गई। मांग पूरी नहीं होने पर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
अदालत ने इन सभी तथ्यों को गंभीर मानते हुए कहा कि सहमति धोखे से ली गई थी, इसलिए विवाह को शून्य घोषित किया जाना कानूनन सही है।
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