झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में भाषा विवाद सुलझाने के लिए 3 जून को उच्च स्तरीय मंत्रिस्तरीय कमेटी की बैठक होगी। भोजपुरी, अंगिका और मगही को शामिल करने पर होगा विचार।
JTET Language Dispute रांची: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) में भाषा चयन को लेकर जारी विवाद के समाधान की दिशा में राज्य सरकार एक बार फिर सक्रिय हो गई है। इस मुद्दे पर गठित मंत्रियों की उच्च स्तरीय कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक 3 जून को आयोजित की जाएगी। बैठक में भोजपुरी, अंगिका और मगही भाषाओं को जिलावार सूची में शामिल करने के प्रस्ताव पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा।
भाषा विवाद को लेकर राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार मांग उठती रही है कि स्थानीय भाषाओं के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस विषय पर व्यापक सहमति बनाने की प्रक्रिया शुरू की है।
JTET Language Dispute: विस्तारित कमेटी की होगी पहली बैठक
राज्य सरकार ने इस मामले के समाधान के लिए गठित उच्च स्तरीय कमेटी का विस्तार किया है। अब कमेटी में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और हफीजुल हसन को भी शामिल किया गया है। दोनों नए सदस्यों के जुड़ने के बाद यह विस्तारित कमेटी की पहली बैठक होगी।
सरकार को उम्मीद है कि विस्तारित प्रतिनिधित्व के साथ होने वाली चर्चा से भाषा विवाद के विभिन्न पहलुओं पर संतुलित और सर्वमान्य निर्णय तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
Key Highlights
जेटेट भाषा विवाद पर 3 जून को होगी उच्च स्तरीय बैठक।
भोजपुरी, अंगिका और मगही को जिलावार सूची में शामिल करने पर चर्चा।
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और हफीजुल हसन को कमेटी में जोड़ा गया।
विस्तारित कमेटी की यह पहली बैठक होगी।
इससे पहले पांच सदस्यीय कमेटी दो बैठकें कर चुकी है।
JTET Language Dispute: पहले भी दो बार हो चुकी है मंत्रियों की बैठक
इससे पहले राज्य सरकार ने पांच सदस्यीय मंत्रिस्तरीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को समन्वयक बनाया गया था। उनके अलावा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, योगेंद्र प्रसाद और संजय प्रसाद यादव सदस्य के रूप में शामिल थे।
पांच सदस्यीय कमेटी ने अब तक दो बैठकों के माध्यम से विवाद को सुलझाने का प्रयास किया है। इस दौरान सभी मंत्रियों की राय ली गई और विभिन्न पक्षों से प्राप्त सुझावों पर चर्चा की गई।
JTET Language Dispute: भाषाई संतुलन और स्थानीय अपेक्षाओं पर रहेगा फोकस
जेटेट में भाषा चयन का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। कई संगठनों और अभ्यर्थियों की ओर से भोजपुरी, अंगिका और मगही को भी परीक्षा में स्थान देने की मांग की जा रही है। दूसरी ओर स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है।
ऐसे में 3 जून को होने वाली बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बैठक में विभिन्न पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए कोई ठोस रास्ता निकालने की कोशिश की जाएगी, जिससे जेटेट परीक्षा को लेकर बना विवाद समाप्त हो सके।
सरकार के अगले निर्णय पर हजारों अभ्यर्थियों और भाषा संगठनों की नजरें टिकी हुई हैं।
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