लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा अधीक्षक जितेंद्र कुमार पर जांच का आदेश, घटना के बाद जेल प्रशासन की खुली नींद

हजारीबाग. लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा में पदस्थापित कारा अधीक्षक जितेंद्र कुमार के ऊपर जांच का आदेश निर्गत किया गया है। आदेश में कहा गया है कि मीडिया के माध्यम से कारा अधीक्षक जितेंद्र कुमार के विरुद्ध लगातार अनियमित बरते जाने की शिकायतें प्राप्त होती रही हैं। इसको लेकर एक जांच कमेटी गठित की जाती है, जिसमें कारा निरीक्षणालय रांची के निदेशक प्रशासन मनोज कुमार और कारा निरीक्षणालय रांची के कारापाल मोहम्मद नसीम को उनके विरुद्ध जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कहा है कि जानकारी मिल रही है कि अस्पताल में बंदियों को रखना और वीआईपी बंदियों को विशेष सुविधा देने की भी शिकायतें मिली हैं।

केंद्रीय कारा अधीक्षक पर जांच का आदेश

एक फर्जी बीमारी का सहारा लेकर कुख्यात अपराधी जेल से इलाज के नाम पर शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज पहुंचता है और वहां सिक्योरिटी में तैनात हवलदार की हत्या कर वह फरार हो जाता है। जब यह घटना घटी तो जेल आइजी की नींद खुली और उन्होंने आनन फानन में 1 घंटे के भीतर जांच का आदेश जारी कर दिया, लेकिन जांच का आदेश पत्र भी हास्यास्पद माना जा रहा है।

जांच का आदेश उस वक्त निर्गत किया गया है, जब हजारीबाग शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उम्र कैद की सजा काट रहा कैदी शाहिद अंसारी सुरक्षा कर्मी चौहान हेंब्रम की हत्या कर फरार हो गया है। शाहिद अंसारी के ऊपर हत्या और पॉक्सो एक्ट के तहत सजा सुनायी गयी थी। बताया जाता है कि नियम को ताक पर रखकर जेल अधीक्षक ने कैदी को इलाज के लिए शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल जेल अस्पताल से हस्तांतरित किया था।

कारा अधीक्षक जितेंद्र कुमार पूर्व से विवादों में रहे हैं। जब वह मेदिनीनगर से स्थानांतरित होकर हजारीबाग केंद्रीय कारा पहुंचे तो मेदनी नगर में बगैर संबंधित वरीय पदाधिकारी के आदेश के खास बंदी को पैरोल की स्वीकृति देने के आरोप में स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन उस स्पष्टीकरण पर भी किसी भी तरह की कोई कार्रवाई उन पर नहीं हुई। प्राप्त खबर के मुताबिक, जेपी कारा में कभी भी ऐसी स्थिति नहीं बनी की मैगजीन की जिम्मेदारी एक्स आर्मी को सौंपी गई हो, लेकिन हजारीबाग में योगदान देते ही सारे नियमों को ताक पर रख कर जितेंद्र कुमार ने सरकारी कर्मी को हटाकर यह जिम्मेदारी एक्स आर्मी चंदन तिवारी को सौंप दी है, जो एक कांटेक्ट कर्मी की तरह होते हैं। हास्यास्पद है कि एक सेंट्रल जेल के कारा अधीक्षक के विरुद्ध जांच की जिम्मेदारी कारापाल को सौंपी जाती है।

शशांक शेखर की रिपोर्ट

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