डिजीटल डेस्क : America की सत्ता में ट्रंप की वापसी से हिला ईरान, बढ़ाया दोस्ती का हाथ। America में संपन्न हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप के जीतने के बाद उनके व्हाइट हाउस में वापसी से पहले ही ईरान बुरी तरह हिल गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने अभी कुर्सी संभाली भी नहीं है लेकिन ईरान को अपने बुरे भविष्य की फिक्र सताने लगी है।
ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप की तरफ दोस्ती के लिए हाथ बढ़ाया है। ईरान के स्ट्रेटेजिक अफेयर के उपाध्यक्ष मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने डोनाल्ड ट्रंप से अपील की कि – ‘वे अपने पहले कार्यकाल के दौरान ईरान के खिलाफ अपनाई गई अधिकतम दबाव की नीति का पुनर्मूल्यांकन करें’।
ईरान का अनुरोध – ट्रंप नए कार्यकाल में अतीत की गलती न दोहराएं
America में संपन्न हुए राष्ट्रपति के चुनाव के दौरान जैसे ही चुनाव नतीजों का झुकाव ट्रंप की तरफ हुआ, वैसे ही ईरान की करेंसी अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी। उसके बाद ईरान ने ट्रंप से उसके प्रति सख्त रुख में बदलाव करने की मांग करना शुरू कर दिया है।
ईरान के स्ट्रेटेजिक अफेयर के उपाध्यक्ष मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि ट्रंप को यह दिखाना चाहिए कि वे अतीत की गलत नीतियों का पालन नहीं कर रहे हैं। ईरान के स्ट्रेटेजिक अफेयर के उपाध्यक्ष की ये अपील ऐसे समय में आई है जब वाशिंगटन ने तेहरान पर ट्रंप हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है।
अमेरिकी अधिकारियों ने एक अफगान मूल के नागरिक को ट्रंप की हत्या की साजिश रचने के मामले में गिरफ्तार किया है, जिसमें आरोप है कि उसके पीछे ईरान था।

ट्रंप के पिछले कार्यकाल में America ने ईरान पर लगाए थे कई कड़े प्रतिबंध
ट्रंप के पिछले कार्यकाल के दौरान America ने ईरान पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए थे। आईआरजीसी चीफ कासिम सुलेमानी की भी बगदाद में अमेरिका ने हत्या करवाई थी। उसके बाद से ईरान ने कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने की कसम खाई है।
ट्रंप की जीत के बाद से ही इजराइल में खुशी की लहर है। इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप को बधाई देते हुए उनकी जीत को ऐतिहासिक जीत करार दिया था।
वहीं ईरान की मार्केट में ट्रंप की जीत के बाद से ही गिरावट देखी गई है। ईरान के कारोबारियों को डर है कि ट्रंप सत्ता में वापसी करने के बाद जंग में इजराइल का खुले तौर पर साथ दे सकते हैं और ईरान के ऊपर और कड़े प्रतिबंध लागू कर सकते हैं।

अमेरिका के सातों बैटलग्राउंड में जीत दर्ज कर डोनाल्ड ट्रंप ने सबको चौंकाया
अमेरिका के 50 राज्यों में से सात राज्य ऐसे हैं, जिनको बैटलग्राउंड कहा जाता है। ट्रंप ने इन सभी राज्यों में जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया है। अब उनकी और रिपब्लिकन पार्टी की अमेरिका में स्थिति मजबूत हो गई है, क्योंकि माना जाता है कि इन्ही बैटलग्राउंड से होकर व्हाइट हाउस का रास्ता जाता है।
अब तक अमेरिका में कुछ राज्य ऐसे रहे हैं जहां से हमेशा डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ही जीतता है, तो कुछ ऐसे जहां रिपब्लिकन का कब्जा रहता है। हालांकि बैटलग्राउंड पर कभी किसी एक पार्टी का वर्चस्व नहीं रहा और जिस तरफ ये राज्य चले जाते हैं, वही राष्ट्रपति की गद्दी पर बैठता है। इन राज्यों में सबसे अहम एरिजोना माना जाता है।
ट्रंप ने एरिजोना के साथ-साथ कमला हैरिस को सभी सात बैटलग्राउंड स्टेट में चित कर दिया है। इस चुनाव में एरिजोना, नेवादा, विस्कॉन्सिन, मिशिगन, पेंसिल्वेनिया, उत्तरी कैरोलिना और जॉर्जिया सात के सात स्टेट ट्रंप ने अपने नाम किए हैं।

एरिजोना में जीत के साथ ट्रंप के इलेक्टोरल कॉलेज की संख्या हुई 312
एरिजोना में जीत के साथ ट्रंप के इलेक्टोरल कॉलेज की संख्या 312 हो गई, जबकि उपराष्ट्रपति हैरिस के 226 पर हैं। एरिजोना में 11 इलेक्टोरल कॉलेज वोट हैं। एरिज़ोना में ट्रंप ने सीमा सुरक्षा, आप्रवास और अवैध प्रवासियों की ओर से किए गए अपराधों जैसे प्रमुख मुद्दों को अपना हथियार बनाया था।
बाइडेन के कार्यकाल के दौरान एरिज़ोना के मतदाता रिकॉर्ड संख्या में आप्रवासियों के आगमन से प्रभावित हुए थे। ट्रंप की जीत के साथ ही रिपब्लिकन पार्टी ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों हाउस में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट में 52 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेट्स ने 47 सीटें जीती हैं।
इसके साथ ही हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी रिपब्लिकन ने 216 सीटों पर कब्ता कर लिया है, वहीं कमला हैरिस की पार्टी को 209 सीटें मिली हैं। सदन में बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत है और रिपब्लिकन पार्टी को उम्मीद है कि वे बची सीटों को भी जल्द पूरा कर लेंगे।
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