डिजीटल डेस्क : ISKCON ने चिन्मय कृष्ण दास से झाड़ा पल्ला। ISKCON ने हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास प्रभु से पल्ला झाड़ लिया है।
माना जा रहा है कि ISKCON ने काफी दबाव में यह फैसला लिया है। बांग्लादेश में बने हालात, अंतरिम सरकार के रुख और कट्टरपंथी संगठनों का लगातार अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाए कर हिंसक हमले की घटनाएं जारी रखने ISKCON अपने आश्रमों रह रहे अल्पसंख्यक हिंदुओं के जानमाल की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया है।
ISKCON बांग्लादेश ने चिन्मय कृष्ण दास पर जारी किया बयान…
चौंकाने वाले घटनाक्रम के तहत राजद्रोह के आरोप में दर्ज मामले में जेल में डाले गए संत चिन्मय कृष्ण दास प्रभु से ISKCON पदाधिकारियों ने दूरी बना ली है। बांग्लादेश सरकार, कट्टरपंथी संगठनों और सभी संबंधितों के लिए ISKCON बांग्लादेश ने गुरूवार को बाकायदा बयान जारी किया।
ISKCON बांग्लादेश के महासचिव चारू चंद्र दास ने ढाका में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि – ‘चिन्मय प्रभु के किसी भी बयान या गतिविधियों के लिए संस्थान जिम्मेदार नहीं है। चिन्मय प्रभु को हाल ही में इस्कॉन से निकाल दिया गया था’।
बता दें कि बांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी को लेकर बवाल बढ़ता जा रहा है। बांग्लादेश सम्मिलित सनातन जागरण जोत के प्रवक्ता चिन्मय दास पर बीते अक्टूबर में हुई एक रैली के दौरान बांग्लादेश के राष्ट्रीय झंडे का अपमान करने का आरोप है।
अब चिन्मय दास की गिरफ्तारी और जमानत न मिलने पर उनके समर्थकों में बीते मंगलवार को कोर्ट के बाहर हिंसक विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें एक सरकारी वकील की जान चली गई। इस घटना के बाद बांग्लादेश का कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी इस्कॉन के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बनाने के लिए एक्टिव हो गया।

ISKCON बांग्लादेश हाईकोर्ट पाबंदी लगाने से किया इंकार लेकिन संकट बरकरार…
बांग्लादेश में जारी तनाव और विवाद के बीच गुरूवार को ISKCON को ढाका हाईकोर्ट से बड़ी भले ही मिली और पाबंदी लगाने से साफ मना कर दिया गया लेकिन उस पर अभी संकट मंडराया हुआ है।
बीते बुधवार को बांग्लादेश सरकार की ओर से वकील मोनिरुज्जमां ने जस्टिस फराह महबूब और जस्टिस देबाशीष रॉय चौधरी की पीठ के सामने ISKCON पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका दायर की थी। याचिका में चटगांव और रंगपुर के इलाकों में इमरजेंसी लागू करने की भी मांग की थी।
गुरूवार को उसी याचिका पर सुनवाई करते हुए ISKCON पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर ढाका हाईकोर्ट के जजों ने कहा कि – ‘सरकार सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ काम कर रही है। हम सरकार की कार्रवाई से संतुष्ट हैं और राज्य की जिम्मेदारी पर हमें भरोसा है। हमारे देश में सभी धर्मों के लोग बहुत सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण हैं।
…आपसी सम्मान और प्यार कभी नहीं खोएगा। इसलिए आवेदक को कोई चिंता नहीं करनी चाहिए। लोगों की जान को और कोई नुकसान नहीं होना चाहिए’।

बांग्लादेश में इस समय आतंकी संगठन ABT और जमात के निशाने हैं अल्पसंख्यक हिंदू…
ISKCON बांग्लादेश ने जिस अंदाज में बांग्लादेश के चरमपंथियों और अंतरिम सरकार के दबाव में संत चिन्मय कृष्ण दास प्रभु से पल्ला झाड़ा है, उसने सबके माथे पर बल डाल दिए हैं। इस बीच, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ जारी हिंसा के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है।
मौजूदा अंतरिम सरकार की सरपरस्ती में आतंकी संगठन ABT (अंसारल्लाह बंगला टीम) और जमात-ए-इस्लामी हिंदुओं को टारगेट करने में तेजी से एक्टिव हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश में अइळ यानी अंसारल्लाह बंगला टीम हिंदुओं को टारगेट कर रहा है।
बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से ही आतंकी संगठन ABT (अंसारल्लाह बंगला टीम) एक बार फिर सक्रिय हुआ है। नई अंतरिम सरकार के आते ही ABT चीफ मुफ्ती जशीमुद्दीन रहमानी को जेल से रिहा कर दिया गया था। ABT चीफ रहमानी 15 फरवरी 2013 को एक बांग्लादेशी ब्लॉगर की हत्या के आरोप में जेल में बंद था।
बताया जा रहा है कि जेल से बाहर आने के बाद रहमानी ने फिर से संगठन को मजबूत किया और हिंदुओं को टारगेट करना शुरू कर दिया। बांग्लादेशी हिंदू और गैर बांग्लादेशी हिंदू दोनों ही आतंकी संगठन ABT और जमात-ए-इस्लामी के टारगेट पर हैं।
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